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शहीद बेटे का चेहरा देख बेसुध हुई मां, नम आंखों से हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई

नैनीताल जिले के रातीघाट के शहीद संजय बिष्ट का पार्थिव शरीर कल उनके घर पहुंचा। जवान बेटे का पार्थिव शरीर देखकर मां बेसुध हो गई। पिता कुछ बोल ही नहीं पाए और आंखों से आंसू रूकने का नाम नहीं ले रहे। शहीद संजय को नम आंखों से हजारों लोगों ने अंतिम विदाई दी।

शहीद बेटे का चेहरा देख बेसुध हुई मां

जम्मू के राजौरी में आंतकिंयों से लोहा लेते हुए नैनीताल जिले के रातीघाट के पैरा कमांडो संजय बिष्ट शहीद हो गए थे। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर हेली कॉप्टर से घोड़ाखाल लाया गया जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके घर लाया गया। जवान बेटे का चेहरा देख मां मंजू देवी, पिता देवेंद्र सिंह बिष्ट बेसुध हो गए। रिश्तेदारों ने उन्हें किसी तरह संभाला। जबकि शहीद के भाई बहनों का रो-रो कर बुरा हाल है।

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सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में दी गई श्रद्धांजलि

शहीद संजय बिष्ट का पार्थिव शरीर शुक्रवार दोपहर दो बजे सैनिक स्कूल घोड़ाखाल पहुंचा। सैनिक स्कूल में उनके पार्थिव शरीर को रानीखेत केआरसी के ब्रिगेडियर गौरव बग्गा,नैनीताल एसडीएम प्रमोद कुमार, केआरसी रानीखेत के कर्नल राजेश रद्द, सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के प्रधानाचार्य ग्रुप कैप्टन विजय डंगवाल ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

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नम आंखों से हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई

शहीद पैरा कमांडो संजय बिष्ट को रातीघाट के शिप्रा नदी और जाख नदी के संगम तट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान हर किसी की आंखे नम हो गई। संगम तट पर मौजूद सैकड़ों लोगों ने उन्हें जब तक सूरज चांद रहेगा शहीद संजय बिष्ट तेरा नाम रहेगा।

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इसके साथ ही भारत माता की जय आदि देशभक्ति के जयकारे लगाकर अंतिम विदाई दी। शहीद संजय बिष्ट के पार्थिव शरीर को घोड़ाखाल से रातीघाट ले जाते हुए हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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