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नीम करौली बाबा : कैसे बाबा ने ली थी महासमाधि, क्या हुआ था उस दिन ?

नीम करौली बाबा के भक्त भारत में ही नहीं के बल्कि विदेशों में भी हैं। बाबा के चमत्कारों के बारे में सुन हर कोई हैरान हो जाता है। लेकिन क्या आपको पता है की आखिर कैसे बाबा ने महासमाधि ली थी ? बाबा कि महासमाधि के दिन क्या हुआ था ?

कैसे ली थी नीम करौली बाबा ने महासमाधि ?

सुबह का समय था नीम करौली बाबा अपने सीने में दर्द के इलाज करा कर आगरा से वापस आ रहे थे। ट्रेन में उनके अन्य भक्त भी बैठे थे। अचानक बाबा की देह अकड़ने लगी बाबा के भक्त इसे देख कर घबरा गए और मथुरा स्टेशन में उतर गए। मथुरा स्टेशन में बाबा ने अपने भक्तों से कहा की मुझे वृंदावन जाना है।

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लेकिन उनके नाजुक हालत देख कर भक्त उन्हें वृंदावन ना लेजाकर पास ही के एक अस्पताल ले गए। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर ने बाबा को इंजेक्शन दिए और उनके चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगा दिया। डॉक्टर्स ने बाबा के भक्तों को बताया कि बाबा अभी डायबिटिक कोमा में हैं लेकिन उनकी पल्स ठीक है तो घबराने की कोई बात नहीं है।

अस्पताल में ही त्याग दी थी देह

बाबा नीम करौली महासमाधि लेने के लिए ये लीला रच रहे थे। बाबा अस्पताल के एक कमरे में सोए हुए थे। उनके भक्त उनके आस पास खड़े थे। अचानक बाबा के हाथों में मूवमेंट हुई भक्त खुश हो गए। तभी महाराज जी चौंक कर जाग गए और उन्होंने अपने चेहरे से ऑक्सीजन मास्क निकाल फेंका।

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अपनी बांह से रक्तचाप मापने वाले बैंड खींच कर फेंकते हुए वो बोले बेकार है बेकार है। अपनी देह त्यागते समय बाबा नीम करौली ने गंगा जल मांगा लेकिन उस अस्पताल में गंगाजल कैसे मिलता। इसलिए उनको गंगाजल की जगह सामान्य पानी ही दे दिया गया। पानी पीते ही महाराज नीम करोली ने “जय जगदीश हरे” रटते रटते 11 सितंबर, 1973 की सुबह लगभग 1:15 बजे अपनी देह त्याग दी।

बाबा का जीवन है सादा जीवन उच्च विचार की मिसाल

बाबा नीम करोली उनका जीवन सादा जीवन उच्च विचार की मिसाल है। बाबा के भक्तों में गोविन्द बल्लभ पंत और नारायण दत्त तिवारी भी शामिल थे। उनकी आंखों में कुछ ऐसा जादू था कि वो एक बार किसी को देख लें तो उसे अपना भक्त बना लें। इसी का असर है कि आज भी बाबा के इतने भक्त हैं।

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हावर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बन गए थे बाबा के भक्त

महाराज की आंखों का जादू ही था कि हावर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड अल्बर्ट उनके भक्त बन गए। जिनको बाबा ने नाम दिया राम दास। इसके अलावा महाराज ने स्टीव जॉब्स से लेकर मार्क जुकरबर्ग के दिल और दिमाग पे गहरी छाप छोड़ी। महाराज जी हमेशा ये कहा करते थे कि अगर मैंने तुम्हारा हाथ थाम लिया तो एक बार को तुम मेरा हाथ छोड़ सकते हो पर मैं तुम्हारा हाथ कभी नहीं छोडूंगा।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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