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करोड़ों की काली कमाई में जेल काटने वाले मृत्युंजय मिश्रा पर सरकार मेहरबान, बनाया दो महकमों का OSD

उत्तराखंड के सबसे चर्चित अफसरों में से एक आर्युवेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव रहे मृत्युंजय मिश्रा में सिस्टम ने बड़ी मेहरबानी की है। मृत्युंजय मिश्रा को आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय में ओएसडी नियुक्त कर दिया गया है। इस संबंध में आदेश जारी हो गया है।

तैनाती के आदेश जारी

मृत्युंजय मिश्रा को आयुष एवं आयुष शिक्षा, उत्तराखण्ड शासन के कार्यालय ज्ञापन संख्या-977/XL-1/2023- 19/2010 TC-II, दिनांक 26 जून, 2023 के द्वारा आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, निदेशालय, देहरादून में सृजित ओ०एस०डी० (विशेष कार्याधिकारी आयुष) के 01 अस्थायी निःसंवर्गीय पद (वेतनमान रू० 144200-218200 वेतन लेवल-15 ) पर नियुक्ती दी गई है। राज्यपाल के आदेश से ये तैनाती हुई है।

लंबा इतिहास है, जेल भी गए

आपको बता दें कि मृत्युंजय मिश्रा हमेशा से विवादों में रहें हैं। यही नहीं वो भ्रष्टाचार के मामले में जेल भी जा चुके हैं। दरअसल हायर एजुकेशन के टीचर मृत्युंजय मिश्रा 2007 में उत्तराखंड तकनीकि विश्वविद्यालय के कुलसचिव बने। वहां उनके ऊपर तकरीबन 85 लाख रुपए के गबन का आरोप लगा। शासन जब परेशान हुआ तो उन्हे कुलसचिव पद से हटा दिया गया। इसके कुछ सालों बाद उन्हे उत्तराखंड आर्युवेदिक विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार बना दिया गया। वहां भी उनपर एक करोड़ रुपए के घपले का आरोप लगा। विजिलेंस की जांच हुई, और विजिलेंस ने उन्हे जेल तक भेज दिया।

4700 पेज की चार्जशीट

मिश्रा के खिलाफ कोर्ट में 4700 पेज की चार्जशीट दाखिल हुए। इसमें उनपर लगे आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं। मिश्रा पर 2013 से 2017 तक कुलसचिव रहते कई फर्जी यात्राएं दर्शाकर धन हड़पने, अपने भाई धनंजय की पत्नी आरती मिश्रा को गलत ढंग से नियुक्ति देने, शिल्पा त्यागी, नूतन रावत की तीन फर्माें से नियमों की अनदेखी कर सामान का क्रय करने, फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंक खाते खुलवाने का आरोप है। 

‘ऊपर’ तक पहुंच और सिस्टम चुप

सिस्टम के काम करने का तरीका देखिए कि जब मिश्रा जेल से छूटे तो उन्हे फिर से उसी विश्वविद्याल में कुलसचिव के पद पर बैठा दिया गया। शासन के इस फैसले पर गंभीर सवाल उठे। यहां तक कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज जोशी ने एतराज जताया लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। बात सीएम धामी तक भी पहुंची लेकिन हुआ कुछ नहीं।

बताते हैं कि मृत्युंजय मिश्रा की ‘ऊपर’ तक पहुंच है। यही वजह है कि करप्शन के मामले में जेल जाने के बाद भी उनपर शासन ने पूरी मेहरबानी बना कर रखी है।

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