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भारत-चीन युद्ध में वीरान हुए गांव को मिला पर्यटक स्थल का दर्जा, उत्तराखंड के लद्दाख में फिर लौटेंगी खुशियां

भारत-चीन युद्ध में वीरान हुए उत्तराखंड के एक गांव को पर्यटक स्थल का दर्जा मिला है। उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड ने प्रदेश के सीमावर्ती गांव “जादुंग” को पर्यटक स्थल बनाए जाने की घोषणा की है। जादुंग उन पांच गांवों में से पहला है, जिनका न सिर्फ पुनर्वास किया जाएगा बल्कि जिसको पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

इस सीमावर्ती गांव को मिला पर्यटक स्थल का दर्जा

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के एक पुराने सीमावर्ती गांव “जादुंग” को उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड ने उत्तराखंड राज्य में अगले पर्यटन स्थल के रूप में घोषणा की है। इस घोषणा के बाद अब इस क्षेत्र का पुनर्वास किया जाएगा। इसके साथ ही इस क्षेत्र को एस्ट्रो टूरिज्म, ट्रेकिंग, हाइकिंग, नेचर कैंप और के लिए एक स्थायी पर्यटन स्थल बनाने में भी मदद की जाएगी।

भारत-चीन युद्ध में वीरान होने वाला पहला गांव जिसका होगा पुनर्वास

जादुंग गांव भारत तिब्बत सीमा पर बसा एक छोटा सा गांव है। जो कि लुभावने हिमालय के बीच बसा हुआ है। हरी-भरी घाटी के लिए अपने बर्फ से ढके पहाड़ों के साथ बेजोड़ प्राकृतिक सुंदरता आपका मन मोह लेगी। ये गांव लगभग 3800 मीटर की ऊंचाई पर और हरसिल से लगभग 45-50 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है।

इसकी सुंदरता को देख कर लोग इसे उत्तराखंड का लद्दाख भी कहते हैं। बेहद ही खूबसूरत इस गांव की तस्वीर 1962 में भारत और चीन के बीच में युद्ध के बाद बदल गई। 1962 से पहले भारत तिब्बत व्यापार का सिल्क रूट हुआ करता था लेकिन युद्ध के बाद ये गांव वीरान हो गया लेकिन तब से लेकर अब तक ये गांव वीरान ही है।

अब फिर गुलजार होगा “जादुंग”

वीरान हुए इस गांव की अब तस्वीर बदलने वाली है। उत्तराखंड सरकार ने अब इस गांव को पर्यटक स्थल का दर्जा दे दिया है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने जादुंग के पहले एफएएम दौरे को झंडी दिखा कर रवाना किया। उन्होंने कहा कि “हमें ‘जादुंग’ की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। उत्तराखंड का नवीनतम पर्यटन स्थल।

आगंतुकों के लिए उत्तराखंड की अनूठी संस्कृति और सुंदरता का अनुभव करने का यह एक शानदार अवसर है। हम राज्य में जिम्मेदार और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एस्ट्रो टूरिज्म की शुरुआत के साथ हमें उम्मीद है कि इस पहल से उत्तराखंड को लाभ होगा। स्थानीय समुदाय और आगे राज्य के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।”

25 विशेष आमंत्रितों के पहले FAM दौरे में विभिन्न साहसिक पर्यटन उद्योग विशेषज्ञ, खगोल पर्यटन विशेषज्ञ, मीडिया और पर्यटन मंत्रालय और UTDB के अधिकारी शामिल हैं। टीम उत्तरकाशी जिले उत्तरांचल में हरसिल, बागोरी, मुखवा, धरालीऔर नेलोंग घाटी का भी दौरा करेगी।

रोमांच पसंद करने वालों के लिए बेहद खास है ये गांव

रोमांच पसंद करने वालों के लिए जादुंग और इसके आस-पास ट्रेकिंग, लंबी पैदल यात्रा, बर्ड वाचिंग और साथ ही प्रकृति शिविर जैसी गतिविधियों की एक श्रृंखला सरकार पेश करेगी।

आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक वास्तुकला का अनुभव करके आगंतुक स्थानीय संस्कृति में भी डूब सकते हैं।। बोर्ड का मानना ​​है कि जिम्मेदार और टिकाऊ पर्यटन स्थानीय समुदायों के विकास और विकास को बढ़ावा देगा और उत्तराखंड को भारत में एक पसंदीदा पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने में मदद करेगा।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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