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आंदोलनकारियों के आरक्षण पर सरकार ले रही कानूनी राय

Government is taking legal opinion on the reservation of agitators

राज्य गठन के बाद सरकार समय समय पर आरक्षण लेकर आई जिसका लाभ प्रदेशवासियों को मिला, लेकिन वक्त के साथ हाईकोर्ट ने राज्य में चले आ रहे आरक्षण को खत्म कर दिया। खेल कोटे से दी जा रही सरकारी नौकरी, आंदोलनकारियों को दिए जा रहे आरक्षण के साथ हाईकोर्ट ने महिला आरक्षण को खत्म कर दिया। मगर अब उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण को लेकर राज्य सरकार इस ओर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। कहा जा रहा है कि इस बार राज्य स्थापना दिवस 9 नवंबर को राज्य आंदोलनकारियों को सरकार की ओर से आरक्षण का तोहफा दिया जा सकता है।

महिलाओं को जो आरक्षण सरकारी नौकरियों में मिलता था उस पर कोर्ट ने रोक लगा दी है. लेकिन महिला आरक्षण को फिर देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा है। वहीं राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पर रोक लगी हुई है। उस पर भी सरकार कानूनी राय लेने का मन बना चुकी है। बता दें कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को मिलने वाले 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पर कोर्ट ने सरकार को झटका दिया। उस वक्त हरीश रावत सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों को दिए जाने वाले आरक्षण को बहाल करने के लिए सदन में विधेयक पारित किया, जो आज भी राजभवन में लंबित पड़ा हुआ है। साल 2018 में आरक्षण का शासनादेश सर्कुलर और अधिसूचना को तीनों कोर्ट ने खारिज कर दिया।

इसी साल हाईकोर्ट ने राज्य की मूलनिवास महिलाओं को दिए जा रहे क्षैतिज आरक्षण पर भी पाबंदी लगाई। हाईकोर्ट से आरक्षण पर मिले झटकों पर सरकार ने मंथन शुरु किया। राज्य की महिलाओं को दिए जा रहे आरक्षण को बहाल करने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी और राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण देने के लिए कानूनी राय लेने का मन बना चुकी है। धामी सरकार के इस फैसले की संगठन भी सराहना कर रहा है। वहीं सरकार की तरफ से उठाए जा रहे कदम पर विपक्ष भी पैरवी करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष माहरा ने कहा है कि मेन सिस्टम में जब राज्य आंदोलनकारी आएंगे तो प्रदेश का विकास और तेज़ी से होगा। सरकार के फैसले पर जहां पक्ष विपक्ष की एक राय दिख रही है तो राज्य आंदोलनकारी असमंजस में हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि इस मामले में सरकार उन्हें पहले ही आश्वस्त कर चुकी है, तो फैसला लेने में इतना समय क्यों लिया जा रहा है। मामले में लिपापोती के बजाए सरकार को आने वाले स्थापना दिवस पर आंदोलनकारियों को आरक्षण का तोहफा देना चाहिए। राज्य आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि धामी सरकार राज्य स्थापना दिवस पर उन्हें आरक्षण की तोहफा देगी।

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