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अंकिता मर्डर केस। पुलिस के रवैए पर उठे सवाल, सबूत मिटाने और आरोपियों को बचाने का आरोप

congress protest for ankita murder caseअंकिता भंडारी मर्डर केस में भले ही पुलिस अपनी तरफ से पूरी तत्परता दिखाने का दावा कर रही हो लेकिन सच ये भी है कि एक बड़ा तबका अंकिता भंडारी केस में पुलिसिया रवैए को लेकर विश्वास नहीं दिखा पा रहा है। यही वजह है कि राज्य के अलग अलग जिलों में अंकिता भंडारी मर्डर केस की सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहें हैं।

वहीं देहरादून में भी बुधवार को कई संगठनों ने अंकिता भंडारी मर्डर केस की सीबीआई जांच की मांग को लेकर धरना दिया है। कांग्रेस ने भी देहरादून के गांधी पार्क के बाहर अंकिता भंडारी केस की जांच में हीलाहवाली करने और सबूतों को मिटाने का आरोप लगाते हुए धरना दिया है। इस धरने में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के साथ ही गणेश गोदियाल और अन्य कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे।

इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगया कि पुलिस ने सबूतों से छेड़छाड़ की है। हरीश रावत ने पुलिसिया रवैए को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि आरोपियों को सजा तो तब मिलेगी जब सबूत बचेंगे। हरीश रावत ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों को देर से गिरफ्तार किया, इसके साथ ही सबूतों को भी मिटा दिया। यही नहीं आरोपियों को रिमांड पर भी नहीं लिया गया। अंकिता का शव बरामद करने को लेकर भी हरीश रावत ने निशाना साधा है। हरीश रावत ने कहा है कि बीजेपी पृष्ठभूमि से आने वाले आरोपियों को बचाने के लिए ये दुष्चक्र रचा जा रहा है।

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अंकिता के परजिनों को मुख्यमंत्री की ओर से दी गई 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने कहा है कि यह कोई खैरात नहीं है जो सरकार पीड़ित परिजनों को बांट कर वाहवाही लूट रही है।

करण माहरा ने आर्थिक सहायता को एक करोड़ रुपए किए जाने की मांग की है। करण माहरा ने भी अंकिता हत्याकांड के मामले में पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से अंकिता के परिजनों पर दबाव बनाकर जनता के आक्रोश को कुचलने की कोशिश कर रही है।

डीजीपी की ओर से अंकिता के पिता के साथ फोन पर की गई बातचीत का ऑडियो डीजीपी की ओर से सोशल मीडिया में सार्वजनिक करने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है। पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि जिस तरह से इस मामले में सरकार सुनियोजित ढंग से अपराधियों को बचाने के लिए सबूतों को मिटा रही है उससे उन्हें सरकार और पुलिस प्रशासन की जांच पर भरोसा नहीं है। उन्होंने इस मामले में एक बार फिर से हाईकोर्ट के सीटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग दोहराई।

कांग्रेस के साथ ही राज्य के अन्य सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और अन्य लोग भी अंकिता मर्डर केस की सीबीआई जांच की मांग कर रहें हैं। राज्य के अलग अलग जिलों में ये प्रदर्शन हो रहें हैं।

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