AIIMS Rishikesh NewsDehradun NewsHighlight

उत्तराखंड: महालक्ष्मी योजना, बेटियों को सुरक्षा कवच, सुधरेगा लिंगानुपात

Breaking uttarakhand news

देहरादून: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जब से कमान संभाली है, तेजी से काम होते नजर आ रहे हैं। सीएम की तेजी के साथ अफसरों को भी कमदताल करनी पड़ रही है। जिसका सीधा असर कामकाज पर भी नजर आ रहा है। सरकार जहां जनता की समस्याओं को प्राथमिकता से ले रही है। वहीं, जनकल्याणकारी योजनाएं भी संचालित कर रही है।

महालक्ष्मी योजना

ऐसी ही एक योजना महालक्ष्मी योजना है। सरकार ने इस योजना का शुभारंभ महिलाओं और नवजातों की देखभाल के लिए किया है। योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को महालक्ष्मी किट वितरित की जा रही हैं। जिसमें बच्चे और मां के लिए जरूरत का सामान दिया जा रहा है। इसमें जहां मां के स्वास्थ्य की चिंता की गई है। वहीं, नवजात की देखभाल का भी ध्यान रखा गया है। योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य लिंगानुपात में सुधार का भी है।

हर साल 50 हजार महिलाओं और नवजात बालिकाओं को लाभ

मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना से हर साल 50 हजार महिलाओं और नवजात बालिकाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत पहले चरण में करीब 17 हजार महिलाओं को इसका लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि इस योजना का लाभ लिंगानुपात सुधार में भी देखने को मिलेगा।

बेटियां माता-पिता का अधिक ख्याल रखती हैं

उन्होंने कहा कि हम अपने आस पास देखें तो पाएंगे कि बेटों की बजाए बेटियां माता-पिता का अधिक ख्याल रखती हैं। आज कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जिसमें बेटियां बेटों से एक कदम आगे ना हों। सरकार का लक्ष्य योजना का लाभ उन महिलाओं तक पहुंचाने का है, जिनका इसकी सबसे अधिक जरूरत है।

लाभ लेने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकरण अनिवार्य

दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को इस तरह की योजनाओं का कम लाभ मिल पाता है। सीएम धामी ने कहा कि इसका लाभ दूर-दराज की महिलाओं को मिलना चाहिए। इसके लिए अधिकारी को गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रसव के बाद महिला को प्रथम दो बालिकाओं के जन्म पर एक-एक किट और जुड़वा बालिकाओं के जन्म पर महिला को एक और बच्चियों के लिए अलग-अलग दो किट दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ लेने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकरण अनिवार्य है।

आवेदन पत्र के साथ

आवेदन पत्र के साथ माता-शिशु रक्षा कार्ड की प्रति, संस्थागत प्रसव प्रमाण पत्र, यदि घर में प्रसव हुआ तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर अथवा चिकित्सक द्वारा जारी प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की प्रति संलग्न करनी होगी। प्रथम, द्वितीय या जुड़वा कन्या के जन्म के संबंध में स्वप्रमाणित घोषणा पत्र के साथ ही नियमित सरकारी, अर्धसरकारी सेवा या आयकरदाता न होने संबंधी प्रमाणपत्र भी देना होगा।

Back to top button
उत्तराखंड की हर खबर
सबसे पहले पाने के लिए!
📱 WhatsApp ग्रुप से जुड़ें