Dehradun NewsHighlight

देहरादून : DM साहब, क्या शराब की दुकानें भी आवश्यक सेवाओं में आती है?, खुलने का समय 10 से 7

dehradun wine shop

देहरादून : कोरोना के बढ़ते कहर को देखते हुए सरकार ने प्रदेश में नई गाइडलाइन जारी की थी जिसमे शाम 7 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया और आवश्यक सेवाओं से जुड़ी दुकानों के अलावा सभी दुकानों को 2 बजे बंद करने का आदेश जारी किया गया। 2 बजे के बाद सिर्फ आवश्यक सेवाओं से जुड़ी दुकानें ही खुली रहने का आदेश है। इसके बाद आदेश के अगले दिन जब लोगों ने देखा तो सब हैरान रह गए। जी हां बता दें कि देहरादून में कई जगहों पर शराब की दुकानें 2 बजे के बाद भी खुली रही। लोगों ने इसका विरोध किया और सोशल मीडिया पर भड़ास निकाली। लोगों ने सरकार से जिला प्रशासन से सवाल किया कि क्या शराब भी आवश्यक सेवाओं में आती है?

 कई इलाकों में 2 बजे के बाद भी खुली रही शराब की दुकानें

बता दें कि आज गुरुवार को भी देहरादून के कई इलाकों में शराब की दुकानें 2 बजे के बाद भी खुली रही। लोग शराब खरीदते दिखे। सरकारी निर्देशों के अनुसार देहरादून में आवश्यक सेवाओं के अलावा बाकी सभी दुकानें बंद रहनी हैं. इन आवश्यक सेवाओं में सब्ज़ी, दूध, दवा की दुकानें तो हैं आश्चर्यजनक रूप से शराब की दुकानें भी खुली हुई हैं. ऐसे में यह सवाल तो बनता ही है कि क्या हरादून में शराब आवश्यक वस्तु की श्रेणी में आती है? यदि नहीं तो इन्हें किस आधार पर खुलने की अनुमति दी गई है? सरकार से लेकर प्रशासन के पास इसका जवाब नहीं है।

साफ लिखा-शराब की दुकान सुबह 10 से शाम 7 बजे तक खुली

बता दें कि ये तस्वीर पटेलनगर थाना क्षेत्र के बाजार चौकी के पास स्थित शराब की दुकान की है जहां साफ लिखा है कि शराब की दुकान सुबह 10 से शाम 7 बजे तक खुली रहेगी। इससे लोग एक ही सवाल कर रहे हैं कि क्या शराब भी आवश्यक सेवाओं में आती है। लोगों का और व्यापारियों का गुस्सा बढ़ रहा है कि उनकी जरुरी सामानों की दुकानें तो सरकार ने बंद करने का आदेश जारी किया लेकिन शराब की दुकानें खुली हैं जो की युवा पीढी से लेकर कई घरों को बर्बाद करने का काम करता है वो दुकानें खोली गई हैं।

दरअसल पिछले साल लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब है। शायद यही वजह है कि कोरोना के विकराल रुप लेने के बाद भी पीएम मोदी ने लॉकडाउन का ऐलान नहीं किया। वहीं बात करें उत्तराखंड की तो उत्तराखंड पहले ही कर्ज के बोझ तले हैं। ऐसे में शराब से राजस्व ही एक ऐसा ज़रिया है जिससे आय सुनिश्चित की जा सकती है. इसीलिए उत्तराखंड सरकार प्रत्यक्ष रूप से शराब लॉबी के दबाव में भी नज़र आती है. पहली बार शराब कारोबारियों ने अपनी मांगें मनवाने के लिए हड़ताल की और सरकार ने उनकी मांगों पर विचार का आश्वासन दिया.

Back to top button
उत्तराखंड की हर खबर
सबसे पहले पाने के लिए!
📱 WhatsApp ग्रुप से जुड़ें