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गैरसैंण कमिश्नरी का फैसला स्थगित करने पर पूर्व CM त्रिवेंद्र रावत का बयान, आगे बोले- NO कमेंट

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देहरादून : गैरसैंण कमिश्नरी के फैसले को स्थगित करने पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत का बयान सामने आया है। बता दें कि पूर्व सीएम ने इसे तीरथ कैबिनेट की अपनी सोच कहा। साथ ही कहा कि हमारे समय में सरकार द्वारा कमिश्नरी बनाने का निर्णय ग्रीष्मकालीन राजधानी परिक्षेत्र के सुनियोजित विकास और भविष्य की सोच के साथ लिया गया था। हम चाहते थे कि गैरसैंण कमिश्नरी कुमाऊं और गढ़वाल की मिली जुली संस्कृति नया प्रयाग बने।

डिफेंस कालोनी स्थित आवास पर शनिवार को मीडिया से बात करते हुए पूर्व सीएम बोले कि निश्चित रूप से गैरसैंण को कमिश्नरी घोषित करने से पहले मैंने वहां के विधायकों की राय भी ली। मुझे इस तरह की आशंका थी कि इस तरह के सवाल भी उठेंगे। लेकिन गैरसैंण को कमिश्नरी के सवाल पर सभी ने कहा कि किसी को किसी तरह की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि गैरसैंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है। गैरसैंण के भावी विकास की दृष्टि से भी यह जरूरी था। गैरसैंण राजधानी परिक्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए उन्होंने 10 साल के लिए 25 हजार करोड़ का रोडमैप बनाया था। उस पर काम भी शुरू हो गया है। गैरसैंण भराड़ीसैंण में नियमित रूप से विधानसभा सत्र होंगे, वहां पर कानून व्यवस्था बनाने, प्रदेश की जनता की मांगों के त्वरित निस्तारण और राजधानी परिक्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस के नियमित रूप से वहां बैठने के लिए गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने की सोच थी।

पूर्व सीएम ने कहा कि सोच यही थी कि धीरे-धीरे राजधानी परिक्षेत्र का सुनियोजित और तेजी से विकास हो सके। कहा कि हां, कुछ लोगों का कहना था कि कमिश्नरी में पिथौरागढ़ को शामिल करना चाहिए था, इस पर हमने विचार करने की बात कही थी। जहां तक गढ़वाल और कुमाऊं की अलग-अलग संस्कृति का सवाल है, निश्चित तौर पर अल्मोड़ा को कुमाऊं का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। संस्कृति गंगा की तरह है कि जो भी उसमें मिलता है वह कभी अपना रूप नहीं बदलती है। बल्कि उसे आत्मसात कर लेती है। गंगा में जितने भी संगम मिलते हैं वह गंगा ही रहती है। इसी तरह से संस्कृति होती है। जहां तक कैबिनेट और सरकार का कमिश्नरी को स्थगित करने का निर्णय है, उस पर वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। यह सरकार की अपनी सोच और निर्णय है। हां, उनकी सोच भविष्य की एक ऐसी सोच थी जिसमें गैरसैंण को गढ़वाल और कुमाऊं की एक वृहद सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की थी। जिसमें समूचे उत्तराखंड की झलक देश-दुनिया को दिखाई दे।

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