
उत्तराखंड में अफसरशाही हमेशा से सरकार पर हावी रही है। त्रिवेंद्र सरकार के कार्यकाल में भी ऐसा ही माना जाता रहा है कि अफसरशाही अपने हिसाब से सरकार को चलाती थी और लग रहा है तीरथ सिंह रावत सरकार में भी अफसरों के दिखाए रास्ते पर ही आगे बढ़ने का प्लान बनाया गया है।
इसका नमूना इस बात से भी मिलता है कि उत्तराखंड में बीजेपी सरकार के चार साल पूरे होने वाले कार्यक्रम को टाल दिया गया है। बताया जा रहा है कि सरकार को जश्न टालने की सलाह अधिकारियों ने दी है।
दरअसल 18 मार्च को राज्य की सभी 70 विधानसभाओं में सरकार के चार साल पूरे होने पर कार्यक्रमों का आयोजन होना था। त्रिवेंद्र सरकार ने इसे बड़े आयोजन के तौर पर प्लान किया था। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी विधानसभा डोईवाला में मौजूद रहते। डोईवाला से ही राज्य की सभी विधानसभाओं में वर्चुअल तौर पर सीएम त्रिवेंद्र संबोधित करते। त्रिवेंद्र सरकार में तो हर विभानसभा में होने वाले कार्यक्रम की निगरानी के लिए लोगों की तैनाती भी कर दी गई थी। सरकार इस कार्यक्रम को लेकर जोश में थी। बीजेपी के उपाध्यक्ष रमन सिंह जब देहरादून आए थे तो उन्होंने भी मीडिया कर्मियों से यही कहा था कि वो चार साल पूरे होने पर होने वाले जश्न की रूपरेखा की तैयारी के संबंध में चर्चा करने आए हैं।
हालांकि निजाम बदलने के बाद भी तैयारी होती रही। माना जा रहा था कि नए मुख्यमंत्री पुराने मुख्यमंत्री की जगह ले लेंगे लेकिन आखिरकार इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है। मुख्य सचिव के हस्ताक्षर से जारी सूचना के मुताबिक अपरिहार्य कारणों से प्रस्ताविक कार्यक्रमों का रद्द करना बताया गया है।
हालांकि खबरें हैं कि इस कार्यक्रम की अधूरी तैयारियों के चलते अधिकारियों ने इस कार्यक्रम को रद्द करने की सलाह दी है।
