उत्तराखंड में इस सड़क के लिए चढ़ेगी 2200 पेड़ों की बलि, पर्यावरण प्रेमियों ने शुरु की खिलाफत

देहरादून : मसूरी जाने में लोगों को जाम का सामना ना करना पड़े इसके लिए जोगीवाला से मसूरी जाने के लिए मार्ग का चौड़ीकरण प्रस्तावित है। बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए जोगीवाला से मसूरी के बीच 2200 पेड़ों की बली चढ़ाई जा सकती है। शहर के लिए जाम का झाम मुसीबत खड़ा कर रहा है और सड़क बनाने के लिए पेड आड़े आ रहे हैं। इसलिए यात्रियों को जाम की स्थिति से बचाने के लिए 2200 पेड़ काटे जा सकते हैं। बता दें कि यात्रियों को जोगीवाला से कुल्हान होते हुए मसूरी पहुंचाने की योजना है जिसमे कई तरह के पेड़ शामिल है।

आड़े आ रहे हैं हजारों नीलगिरी, आम और पीपल के पेड़

मसूरी जाने के लिए जोगीवाला से कुल्हान तक करीब 14 किलोमीटर लंबे दो-लेन मार्ग का चौड़ीकरण किया जाना है। इसके लिए मसूरी और देहरादून वन प्रभाग में करीब 2200 पेड़ चिह्नित किए गए हैं। यह मार्ग जोगीवाला से रिंग रोड होते हुए लाडपुर से कुल्हान से मसूरी रोड पर मिलेगा। इस रूट पर हजारों नीलगिरी, आम और पीपल के पेड़ हैं, जिनमें से कुछ चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं। इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली समेत अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों को देहरादून शहर में प्रवेश किए बिना सीधे मसूरी भेजना है। जिससे शहर को जाम से निजात मिल सके। खासकर पर्यटन सीजन में शहर और पर्यटक दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।ट

केंद्रीय सड़क कोष से कुल 77 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत

लोक निर्माण विभाग के अनुसार परियोजना को केंद्र से मंजूरी मिल गई है और केंद्रीय सड़क कोष से कुल 77 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हो गई है। यहां मार्ग को चार-लेन में विकसित किया जाना है। जिसमें मार्ग की चौड़ाई न्यूनतम 10 मीटर से 14 मीटर तक रहेगी। हालांकि, अभी परियोजना की निविदा में समय है। लेकिन जद में आ रहे पेड़ों की गिनती कर ली गई है। प्रभागीय वनाधिकारी मसूरी कहकशां नसीम ने बताया कि उन्हें केवल पेड़ों की गिनती का प्रस्ताव दिया गया था। वहीं दूसरी ओर इस योजना के खिलाफ पर्यावरण प्रेमियों ने खिलाफत शुरू कर दी है।

द अर्थ एंड क्लाइमेट इनिशिएटिव संस्था की सदस्य पर्यावरणविद डा. आंचल शर्मा का कहना है कि जोगीवाला-मसूरी मार्ग चौड़ीकरण में पेड़ काटने का विरोध किया जा रहा है। सोशल मीडिया के जरिए भी अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही हस्ताक्षर अभियान और रैली भी प्रस्तावित है। डा. आंचल शर्मा जौलीग्रांट एयरपोर्ट चौड़ीकरण और बालावाला में रिसर्च कालेज के नाम पर पेड़ों के कटान का भी विरोध कर रही हैं।

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