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Women’s Day पर पहाड़ की नारी शक्ति को सलाम, चुनौतियां पार कर बुलंदियों को छू रहीं ये महिलाएं

Women’s Day महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल आठ मार्च को मनाया जाता है। महिला दिवस पर कई तरीकों से महिलाओं को सम्मानित किया जता है। पहाड़ी महिलाओं की जिंदगी भी पहाड़ों की तरह ही होती है। घर परिवार खेत खलिहान सब की देखभाल उन्हें ही करनी होती है। इस सब के बीच भी आज की पहाड़ी महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में सराहनीय कार्य कर देश दुनिया में अपनी पहचान बनाने के साथ ही यहां का नाम भी रोशन कर रही हैं।

Women’s Day पर जानें इन खास महिलाओं के बारे में

आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरूषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। Women’s Day पर आज हम आपको उत्तराखंड की कुछ ऐसी महिलाओं से रूबरू करवाने जा रहे हैं जिन्होंने तमाम चुनौतियों को पार कर एक अलग मुकाम हासिल किया और देश-दुनिया में अपना नाम रोशन किया है।

शशि बहुगुणा रतूड़ी (नमकवाली)

Women’s Day पर हम आपको जिन खास शख्सियत से मिलाने जा रहे हैं वो है उत्तराखंड की नमकवाली। नमकवाली ब्रांड नाम से मशहूर देहरादून के थानो में रहने वाली शशि बहुगुणा रतूड़ी ने पहाड़ी पिस्यूं लूण के जायके को एक ब्रांड में तब्दील कर देश और दुनिया में अपनी पहचान बना ली है। आज नमकवाली ब्रांड के जरिए शशि दुनिया की हर प्लेट में पिस्यूं लूण का जायका बिखेर रही हैं। खुद को नमकवाली ब्रांड से स्टेबलीश करने के साथ साथ वो प्रदेशभर में महिला उत्थान और उत्तराखंड की लोक परंपराओं को बचाने के लिए भी कई काम कर रही हैं।

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नमकवाली ——

यहां तक की उत्तराखंड के मांगल गीतों को जीवित रखने के लिए उन्होंने एक महिला समूह भी बनाया है। अपनी पहचान बनाने के साथ साथ वो ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देकर पहाड़ों की आर्थिकी को संवारने में अहम योगदान दे रही हैं। आज नमकवाली ब्रांड के साथ जुड़कर पहाड़ के कई गांवों की महिलाएं और किसान मोटा अनाज दालें मसाले आदी बेच कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

पहाड़ों के रंग दुनिया को दिखा रही हैं रिया मलारा

रिया मलारा अपनी आर्ट के जादू से पहाड़ों के रंग दुनिया को दिखा रही हैं। Women’s Day पर रिया मलारा की आर्ट से हम आपको रूबरू करवा रहे हैं। पिथौरागढ़ की रहने वाली रिया ने एमिटी यूनिवर्सिटी से फाइन आर्ट्स का कोर्स किया है। जिसके बाद उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति को दुनिया को दिखाने का सोचा और इसके लिए उन्होंने सोशल मिडिया का सहारा लिया। रिया डिजीटल आर्ट के जरिए उत्तराखंड के कलचर को प्रमोट कर रही हैं और जो लोग पलायन या किसी भी कारण हमारी संस्कृति से दूर हो गए हैं रिया अपनी आर्ट के जरिए उनको एक बार फिर अपने कल्चर के पास लेने की कोशिश कर रही हैं।

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रिया मलारा —–

इसके अलावा वो देश और दुनिया के लोगों को भी उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू करवा रही हैं। रिया की आर्ट में पहाड़ों की खूबसूरती यहां के रिति-रिवाज बखूबी झलकते हैं। रिया अपनी आर्ट के जरिए दुनिया के हर इंसान के दिल में पहाड़ों के लिए प्यार जगाना चाहती हैं। बता दें कि रिया को इंस्ट्राग्राम पर आज 23 हजार से फॉलोवर्स हैं।

लाटी कार्टून वाली कंचन

पौड़ी के बिल्टिया गांव में रहने वाली कंचन अपनी लाटी आर्ट के जरिए देश और दुनिया में पहाड़ों का जादू बिखेर रही हैं। Women’s Day के अवसर पर अपने कार्टून के जरिए हर उत्तराखंडी के दिन में राज करने वाली कंडन के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

कंचन की लाटी आर्ट इतनी खूबसूरत है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी इसकी तारीफ किए बिना रह नहीं पाए। उन्होंने कंचन को अपने घर का पता देकर कहा कि इस पते पर इन कार्टून को पार्सल करा दो। लाटी के इन कार्टून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने सोशल मीडिया पर साझा कर चुके हैं।

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कंचन ——

कंचन ने अपने इस अभियान की शुरूआत में एक पहाड़ी लड़की का कार्टून बनाया और उसे लाटी नाम दिया। फिर देखते ही देखते ये लाटी सारे देश में मशहूर हो गई। लाटी कार्टून और उसकी गुदगुदाती पंचलाइन को जरिए कंचन उत्तराखंडवासियों को पहाड़ से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

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लाटी कार्टून——

लोकल उत्पादों को नई पडचान दिला रहीं है विनीता

नैनीताल के गेठिया गांव की रहने वाली विनीता भीटौली स्वयं सहायता समूह के जरिए उत्तराखंड की लोकल उत्पादों को देश और दुनिया में प्रमोट कर रही हैं। फिर चाहे वो यहां की ऐपण आर्ट हो यहां का पहाड़ी पिसा नमक हो, मसाले हों या नेचुरल रंग। उनके प्रोडक्टस इतने खास हैं की मार्कट में भीटौली के प्रोडक्टस की जबरदस्त डिमांड है।

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विनीता बोरा—–

विनीता लोकल उत्पादों को लेकर अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ उत्तराखंड की ग्रामीण महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान दे रही हैं। महिलाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करने के लिए विनिता समय-समय पर प्रशिक्षण भी देती हैं। विनीता भिटौली स्वयं सहायता समूह के जरिए उत्तराखंड की संस्कृति जिंदा रखने का काम भी कर रही हैं। अब तक विनीता कई महिलाओं को अपने व्यापार में जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बना चुकी हैं।

योगा स्किल्स से देश में नाम रोशन कर रही मनीषा

अल्मोड़ा जिले की रहने वाली अपने योगा स्किल्स के जरिए देश और दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। रानीखेत के खनियां गांव में रहने वाली मनीषा ने 37 वें नेशनल गेम्स में योगा में सिल्वर मेडल हासिल किया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल किए हैं।

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मनीषा बिष्ट——-

मनीषा इस साल होने वाले नेशनल गेम्स में भी योगा में रिदमिक और आर्टिस्टिक पेयर दो प्रतियोगिताओं में प्रदेश का प्रतिनिधत्व करेने वाली हैं। इसके साथ ही वो नेशनल लेवल पर प्रदेश का योगा में प्रतिनिधत्व कर चुकी हैं। यहां सबसे खास बात ये है कि मनीषा ने बिना किसी कोच या इंस्ट्यूट के ही अपने गांव में यूट्यूब के जरिए योगा सीखा है और आज वो सारी दुनिया में चमक रही हैं। वो कहते हैं ना की मां, बहू, पत्नी और प्रेमिका हर किरदार बखूबी से निभाती हो, हे नारी तुम सब कुछ मुमकिन कर जाती हो।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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