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देश में दो अलग- अलग तारीख पर हिंदी दिवस क्यों मनाते हैं लोग? जानें इसका कारण और महत्व

हिंदी के प्रचार प्रसार और इसके महत्व को बनाए रखने के लिए हर साल हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी दिवस का उद्देश्य न केवल भारत में बल्कि विदेशों में हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। लेकिन हिंदी दिवस से जुड़ी दो तिथियां है, 10 जनवरी और 14 सितंबर। आइये जानते हैं दोनों तिथियों के बीच का अंतर और भारत में हिंदी दिवस कब मनाया जाता है।

10 जनवरी और 14 सितंबर का इतिहास

बता दें कि 10 जनवरी और 14 सितंबर दोनों ही दिन हिंदी दिवस मनाया जाता है। दोनों का उद्देश्य हिंदी का प्रचार-प्रसार करना है। इनके बीच एक ऐतिहासिक अंतर है। राष्ट्रीय हिंदी दिवस की शुरुआत इसलिए हुई क्योंकि इसी दिन हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रुप में स्वीकार किया गया था। वहीं विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर बढ़ावा देना और उसे वैश्विक पहचान दिलाना है।

हिंदी दिवस 2024 की थीम

इस साल हिंदी दिवस 2024 की थीम ‘हिंदी पारंपरिक ज्ञान से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक’ यानी from traditional to artificial intelligence पर आधारित है।

विश्व हिंदी दिवस का इतिहास

हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार का दिन है। बता दें कि पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर, महाराष्ट्र में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस महत्तवपूर्ण घटना के बाद 10 जनवरी को हर  साल विश्व हिंदी दिवस मनाने का फैसला लिया गया।

राष्ट्रीय हिंदी दिवस का इतिहास

राष्ट्रीय हिंदी दिवस की शुरुआत आजादी के बाद हुई। 14 सिकंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रुप में मान्यता दी। इसके बाद, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने इस दिन को हिंदी दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की। औपचारिक रुप से 14 सितंबर 1953 से राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाने लगा।

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