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हम अंग्रेजों के जमाने के पुल हैं, हम पर चलोगे तो मरोगे!

angrejon ke jamane ke pulरुड़की: अंग्रेजों के जमानें में बने पुरानी गंगनहर के पुल बड़े हादसों को न्यौता दे रहे हैं। पुराने पुलों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। राहगीर इन क्षतिग्रस्त पुलों से गुजरने को मजबूर हैं। उनके पास दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है। कलियर, धनौरी, मेहवड सहित रुड़की में अपनी मियाद पूरी कर चुके पुराने पुल मौत का रास्ता बन चुके हैं। पुलों को खतरनाक घोषित कर जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो गए। किसी को इस बात की सुध नहीं कि अगर पुल खतरनाक हैं, तो फिर लोग कैसे गंगनहर के आर-पार जाएंगे। उनके पास दूसरा कोई रास्ता बचा ही नहीं है।

6-7 पुलों की हालत बदहाल

रुड़की क्षेत्र के 6-7 पुलों की हालत बदहाल है। ये पुल क्षतिग्रस्त हैं। इन्हीं पुलों से सबसे ज्यादा आवाजाही होती है। कुछ समय पहले ही कलियर में बना पुरानी गंगनहर का पुल लगभग 1 फिट अपनी जगह से खिसक गया था। पुल पर बड़ी-बड़ी दरारें भी आ गयी थी। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों ने पुल का जायजा लिया। मरम्मत कराने की बातें कहीं, लेकिन वापस लौटते ही फिर से बस चुप हो गए। धनौरी के पुल पर भी बड़ी-बड़ी दरारंे आ गयी। दोनों पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसके चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

पुलों पर चेतावनी बोर्ड

जिम्मेदार विभाग ने पुलों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर, अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। कई गावों को जोडने वाला पिरान कलियर और धनौरी पुरानी गंगनहर का पुल मौत का रास्ता बन चुका है। फिलहाल इन पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि मोटरसाइकिल और पैदल चलने वाले राहगीर इन्हीं पुलों से गुजर रहे हैं, जो बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। चेतावनी बोर्ड में साफ-साफ लिखा है कि ये पुल अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं, लेकिन कोई और विकल्प ना होने के चलते लोग मजबूरी में इन्हीं पुलों से होकर गुजर रहे हैं।

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