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उत्तराखंड : डाॅक्टरों ने फिर साबित किया, ऐसे ही नहीं कहते धरती का “भगवान”

breaking uttrakhand newsदेहरादून: डाॅक्टरों को लेकर लोगों अलग-अलग धारणाएं हैं। हर पेशे में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो उस पेशे को कलंकित करते हैं। कुछ ऐसे भी होते हैं, जो मापदंड स्थापित करते हैं। ऐसा कुछ देहरादून के डाॅक्टरों ने कर दिखाया। डाॅक्टरों ने साबित किया कि उनको ऐसे ही धरती का भगवान नहीं कहा जाता। दून मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज मीना देवी उम्र 45 साल के लिए अस्पताल के डॉक्टर किसी भगवान से कम नहीं साबित हुए। महिला कई दिन से अस्पताल में भर्ती थी, लेकिन बार-बार संपर्क करने के बाद भी उसके परिवार वाले अस्पताल नहीं आ रहे थे।

महिला को जब जान का खतरा होने लगा, तो डाॅक्टरों ने खुद से जोखिम उठाया और महिला के ब्रेन का आॅपरेशन कर उसकी जान बचा ली। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर डीपी तिवारी, डॉक्टर विजय भंडारी और डॉक्टर अतुल ने महिला का आॅपरेशन किया। प्राचार्य डॉ. आशुतोष सायना ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सकों के लिए आज फिर से पूरी टीम ने एक मापदंड स्थापित किया है।

दरअसल, कुछ दिन पहले दून अस्पताल में बेहोशी की हालत में एक युवक एक महिला को भर्ती करवा लापता हो गया। युवक उनका मकान मालिक बताया जा रहा है। चिकित्सीय जांच में महिला के दिमाग में खून का थक्का जमा होने का पता चला है। इसके लिए उसका ऑपरेशन होना जरूरी था। परिवार के किसी सदस्य के नहीं आने पर महिला का आॅप्रेशन कर दिया गया।

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