
देहरादून : वित्तीय प्रबंधन को लेकर CAG ने बड़ी टिप्पणी की है. मिली जानकारी के अनुसार अगले 10 वर्षों के दौरान सरकार को 26662 करोड़ के कुल बकाया बाजार ऋणों में से 24 हजार 180 करोड़ के बाजार ऋण को चुकाना है जिसमें ब्याज की 15 हजार 863 करोड़ राशि भी है.
CAG की रिपोर्ट में वित्तीय प्रबंधन को लेकर बड़ा खुलासा
CAG की रिपोर्ट में राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर बड़ा खुलासा किया है. राज्य को अपने लिए गए उधार का ब्याज चुकाने के लिए भी ऋण की आवश्यकता होगी जिस कारण साल 2017-18 में 7526 करोड़ में से 3897 करोड़ रुपये लेने पर मजबूर होना पड़ा था. राज्य के विभागीय अधिकारियों द्वारा साल 2018 के विशष्ट उदेशों के लिए दिए गए 164.92 करोड़ के अनुदान संबंधित 102 उपयोगिता प्रमाण पत्र महालेखाकार उत्तराखंड को प्रस्तुत नहीं किये गए.
अगले 10 वर्षों में राज्य को प्रतिवर्ष 4004 करोड़ का करना है औसत भुगतान-cag
जानकारी मिली है कि अगले 10 वर्षों में राज्य को प्रतिवर्ष 4004 करोड़ का औसत भुगतान करना है जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई है. क्योंकि ये वर्ष के दौरान लोक ऋण पुनर्भुगतान के 2 हजार 677 करोड़ से अधिक है जिस कारण भविष्य में पुनर्भुगतान दायित्व काफी हद तक बढ़ जाएगा.
बता दें कि सत्र के पांचवे दिन सदन के पटल पर CAG की रिपोर्ट रखी गयी ये रिपोर्ट त्रिवेंद्र रावत सरकार की पहली CAG रिपोर्ट है जो कीसदन में पेश की गई. CAG रिपोर्ट में राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंध को लेकर सवाल उठे. जिसमें जानकारी मिली कि साल 2017-18 में राजस्व घाटा बढ़कर 19978 करोड़ रुपया हुआ है जबकि साल 2016 -17 में राजस्व घाटा 383 करोड़ रुपया था. वहीं साल 2017 – 18 में राजकोषीय घाटा 7935 करोड़ रुपया मानक लक्ष्य से अधिक हुआ है जो की साल 2016-17 में राजकोषीय घाटा 5467 करोड़ रुपया था
आपको बता दें कि इससे पहले उत्तराखंड की पूर्व हरीश रावत सरकार को लेकर भई कैग ने एक खुलासा किया था। कहा था कि बड़े आकार का बजट बनाकर उसे वक्त पर खर्च न कर पाना सूबे की सरकारों की आदत रही है। लेकिन हरीश सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016-17 के दौरान 31 मार्च तक 573.24 करोड़ की राशि खर्च हो जानी चाहिए थी। उसे वित्तीय वर्ष के ऐन आखिरी दिन सरेंडर कर दिया गया था। प्रदेश सरकार के वित्तीय प्रबंधन की इस गंभीर खामी की पोल भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) ने खोली था और फिर से बड़ी टिप्पणी कैग ने की है जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई है।