उत्तराखंड : 20 दिन पहले ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित होने से पढ़ाई ठप, फैसले पर उठ रहे सवाल, कौन देगा इन सवालों का जवाब?

देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय ने शिक्षा सचिव आर मिनाक्षी सुंदरम को स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित करने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद शिक्षा सचिव ने 30 जून तक स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश भी घोषित कर दिया है। माना जा रहा है कि ये निर्देश शिक्षा मंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के द्धारा डिग्री काॅलेजों और महाविद्यालयों ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषिम करने के बाद दिया है। लेकिन शिक्षा मंत्री के इस निर्देश के बाद कई सवाल शिक्षा मंत्री पर खड़े हो रहे हैं।

पहला यह कि 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित हो गया है,जिसके बाद छात्रों की पढ़ाई का क्या होगा,। कुछ दिन पहले ही शिक्षा विभाग के द्धारा सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर ओदश जारी किया गया था,कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक ऑनलाइन पढाई कराएं,साथ ही जहां पर ऑनलाइन पढ़ाई संभव नहीं है वहां नोट सीट तैयार कर पढ़ाई कराई जाएं। यहां तक कि मिशन कोशिश के तहत सरकारी स्कूलों के छात्रों पढाने की भी योजना शिक्षा विभाग की थी,जिसके लिए बकायदा शिक्षा विभाग ने सीडी तैयार कर सभी स्कूलों को भेज दी थी,लेकिन शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद अब सभी छात्रों की पढ़ाई चैपट होना तय है। क्योंकि ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित होने के बाद 15 अप्रैल के बाद जो नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ था,और अभी पढ़ाई शुरू ही हुई थी। उस पर अब ब्रेक लग गया है।

बात अगर उच्च शिक्षा की करें तो उच्च शिक्षा राज्यमंत्री धन सिंह रावत का कहना है कि डिग्री काॅलेजों और महाविद्यालयों में पढाई का सिलेब्स पूरा हो गया है। वैसे भी डिग्री काॅलेजों और महाविद्यालयों में जुलाई माह से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाता है। लेकिन प्रथामिक और माध्यामिक स्कूलों में अभी तो नया शैक्षण्कि सत्र शुरू ही हुआ था और नया सत्र शुरू होते ही अवकाश घोषित करने से निश्चित तौर से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो गयी है। वैसे भी प्राथमिक स्कूलों की बात करें तो उत्तराखंड में 1 साल से ज्यादा समय से जहां प्रथामिक स्कूल बंद है तो वहीं कक्षा 6 से लेकर 12 तक नामात्र के लिए ही स्कूला खुलें है। लेकिन सवाल इस बात का है कि क्या जब इस महामारी के दौर में ऑनलाइन पढ़ाई ही एक मात्र विकल्प है तो फिर क्या उस ऑनलाइन पढ़ाई से भी करोना का बढ़ने का खतरा है,जिसके लिए ग्रीष्मकालीन अवकाष घोषित किया गया है। शिक्षा मंत्री के समक्ष ये वह सवाल है जिनके जवाब उन्हे देना होगा।

सवाल – क्या ऑनलाइन पढ़ाई से कोराना का खतरा है जो ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है।

सवाल – उत्तराखंड में पिछले एक साल से ज्यादा समय से स्कूल बंद है तो जो नुकासान छात्रों की पढ़ाई का हुआ है,उसे क्या ऑनलाइन पढ़ाई की जरिए नहीं भरा जा सकता था और अगर नहीं भरा जा सकता है तो फिर शिक्षा मंत्री के पास वह कोन सा उपाय है जो छात्रों की पढ़ाई की नुकसान की भरपाई कर सकता है। उसका जवाब भी शिक्षा मंत्री को देना होगा।

सवाल – क्या उत्तराखंड में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर उत्तराखंड सरकार शिक्षकों की ड्यूटी कोविड सेंटरों में या फिर महामारी की रोकथाम में लगाने जा रही है,अगर सरकार शिक्षकों की ड्यूटी कोविड सेंटरों में लगाने जा रही है तो इसे बढ़िया तो शिक्षक छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई के माध्यम से पढ़ा सकते थे और कोविड ड्यृटी में सरकार अन्य कर्मचारियों को लगा सकती थी,जिससे छात्रों की पढ़ाई बाधित न होती।

सवाल – जब उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री शीतकालीन अवकाश में बोर्ड परीक्षार्थियों की पढ़ाई की चिंता कर रहे थे और उनके कहने पर शीतकालीन अवकाश घोषित करने का आदेश जारी हो गया था। हांलाकि उसे बाद भी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर कैंसिल कर दिया गया तो फिर। सर्द मौसम के बाद गर्मी के मौसम आते आते शिक्षा मंत्री का दिल छात्रों की पढ़ाई बाधित करने को लेकर कैसे पिघल गया कि उन्होंने ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित करने के निर्देश दिए। शीतकालीन अवकाश के समय कोराना देश में खत्म नहीं हुआ तब शिक्षा मंत्री ने छात्रों की पढ़ाई का हवाला देते हुए शीतकालीन अवकाश रद्द करने के पक्ष में थे। तक स्कूल खोले जा रहे थे,लेकिन आज स्कूल बंद है पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से हो रही है तो फिर क्यों बच्चों की पढ़ाई का ख्याल शिक्षा मंत्री को नहीं है।

सवाल – शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय ने 20 दिन पहले जो ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया है उसकी भरपाई कैसे होगी,ये बड़ा सवाल है।

सरकारी स्क्ूलों में ग्रीष्मकाीन अवकाश प्राइवेट स्कूल चलाएंगे एक्सट्रा क्लास

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में जहां ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित होते ही ऑनलाइन पढ़ाई पर ब्रेक लग गया । वहीं प्राईवेट स्कूलों का कहना है कि चाहे कुछ भी वह छात्रों की पढ़ाई को देखते हुए तय समय पर पूर सिलेब्स पूरा करेंगे,चाहिए शिक्षकों को ऑनलाइन पढाई कराने के लिए एक्सट्रा क्लास भी चलानी पढ़े।

प्रिंसिफल प्रोग्रेसिव एशोशिएसन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप का कहना है कि 10 वीं और 12 की बोर्ड परीक्षार्थियों के भविष्य को देखते हुए सभी स्कूल एक्सट्रा क्लाॅस भी चला रहे हैं,कई स्कूलों ने जहां अपना सिलेब्स पूरा कर दिया है। वहीं जिन स्कूलों ने 10 वीं और 12 के बोर्ड परीक्षार्थियों का सिलेब्स पूरा नहीं किया है। वह स्कूल 15 जून या 30 जनू तक ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखेंगे। क्योंकि कोई भी स्कूल और शिक्षक नहीं चाहेगा,उनके छात्रों की पढ़ाई बाधित हो,और ऑनलाइन पढ़ाई तो शिक्षक घर से ही करा रहें और छात्र भी घर में ही पढ़ रहें।

अंतर होता है साफ महसूस

प्राईवेट स्कूल जहां अपने छात्रों की पढ़ाई के लिए इस महामारी में भी चिंतित नजर आ रहे है और आॅनलाईन पढ़ाई के जरिए प्राईवेट स्कूल के शिक्षकों ने पूरी ताकत झोकी हुई है,वहीं सरकारी स्कूलों में पढाई का अल्म का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शिक्षक ग्रीष्मकालीन अवकाश के आदेश का इंतजार कर रहे है,कि कब वह इस ऑनलाइन पढाई से टेंशन मुक्त होंगे। लेकिन सवाल उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री पर भी है कि आखिर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई की चिंता उन्हे भी थोड़ी बहुत होती तो फिर वह 20 दिन पहले ग्रीष्मकालीन आवकाश घोषित करने का निर्देश नहीं देते।

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