UKSSSC की ड्राइवर भर्ती परीक्षा की मेरिट लिस्ट से मचा बवाल, नाम और जेंडर एंट्री पर विवाद

UKSSSC की ड्राइवर भर्ती परीक्षा की मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर बेरोजगार संगठनों तक मेरिट सूची में दर्ज नाम, जेंडर और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि आयोग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि मेरिट सूची में आयोग की कोई गलती नहीं हैं।
UKSSSC की ड्राइवर भर्ती परीक्षा की मेरिट लिस्ट से मचा बवाल
UKSSSC का वाहन चालक भर्ती परीक्षा परिणाम चर्चाओं में है। इसमें पास होने वाले अभ्यर्थियों में एक्सप्लोर ज्ञान और यूकेयूएल नाम के भी अभ्यर्थी शामिल हैं। सोशल मीडिया में इससे आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं जबकि आयोग का कहना है कि अभ्यर्थियों ने जो नाम अपने आवेदन पत्र में दिया है, उसी के हिसाब से रिजल्ट जारी हुआ है।
UKSSSC रिजल्ट में अजीब नामों की एंट्री
दरअसल आयोग ने वाहन चालक के 75 पदों के लिए 10 अप्रैल को विज्ञापन जारी करते हुए 31 मई को परीक्षा कराई थी। इसकी आंसर की जारी कर आपत्तियां और सुझाव लिए गए। इसके बाद इसका रिजल्ट जारी कर दिया था। इस रिजल्ट में 144वें स्थान पर EXPLORE GYAN पिता का नाम हरीश चंद्र पांडेय और 234वें स्थान पर UKUL पिता का नाम गोपाल सिंह भैंसोड़ा दर्ज है।
मेरिट सूची की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
सोशल मीडिया में इसे लेकर चर्चाओं का माहौल गर्म है। कुछ अभ्यर्थी इससे सीधे रिजल्ट पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। उत्तराखंड बेरोजगार संघ के उपाध्यक्ष सूरज ने भी मेरिट सूची में कई अभ्यर्थियों के जेंडर को लेकर सवाल उठाए। संघ की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ महिला अभ्यर्थियों को पुरुष और कुछ पुरुष अभ्यर्थियों को महिला दर्शाया गया है, जिससे मेरिट सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी: मर्तोलिया
वहीं आयोग ने आगामी फिजिकल टेस्ट में दूध का दूध पानी का पानी होने का दावा किया है। आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया का कहना है कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हुई है। आवेदन पत्र में दिए गए नाम का मिलान अब अगले चरण में नहीं हुआ तो अभ्यर्थी बाहर होंगे। इन नामों के लिए आयोग कहीं से भी उत्तरदायी नहीं है।
ड्राइविंग टेस्ट और दस्तावेज सत्यापन पर टिकी निगाहें
अब फिजिकल टेस्ट और डॉक्यूमेंट चेक में तय होगा कि ये नाम असली हैं या फर्जी। फिलहाल सबकी नजरें आगामी ड्राइविंग टेस्ट और दस्तावेज सत्यापन पर टिकी हैं। बता दें यही वो चरण होगा जहां ये स्पष्ट हो जाएगा कि मेरिट सूची में दिखाई दे रही खामियां वास्तव में आयोग की गलती हैं या फिर अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन के दौरान दी गई गलत जानकारियों का परिणाम है।