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उत्तराखंड के इन युवावों ने कायम की मिसाल, सेना में बने अफसर

breaking uttrakhand newsदेहरादून: उत्तराखंड को सैन्य बाहुल्य प्रदेश माना जाता है। हो भी क्यों नहीं। प्रदेश के हर परिवार को सैन्य पृष्ठभूमि से कुछ ना कुछ संबंध जरूर रहा है। कोई न कोई ऐसा है, जो सेना से सीधे जुड़ा है। सेना में जाने का जो जज्बा उत्तराखंड के युवाओं में देखने को मिलता है। वैसा कहीं और नजर नहीं आता।भारतीय सेना में अफसर बनने वाले पिथौरागढ़ के विवेक थरकोटी अपनी सफलता का श्रेय दादा को देते हैं। विवेक ने कहा कि उन्हें भारतीय सेना से खास लगाव था। लेकिन उनके पिता बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। ऐसे में उनके दादा ने उन्हें प्रेरित किया। विवेक ने कहा कि वह पिथौरागढ के ग्राम लेलुवड़ के रहने वाले हैं।

अर्जुन बने अफसर

पासिंग आउट परेड पास करके बागेश्वर के अर्जुन सिंह भी भारतीय सेना में बतौर अफसर शामिल हो गए हैं। अर्जुन के पिता चंदन सिंह भी सेना में सूबेदार के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। उनके दादा भी सेना में रहे हैं। चंदन सिंह ने कहा कि बेटा अर्जुन के सेना में शामिल होने पर उनकी तीन पीढ़ियां सेना से जुड़ गई हैं। उनके पिता बतौर सिपाही सेना में रहे। इसके बाद वह सूबेदार और अब उनका बेटा अर्जुन सिंह बड़े सैन्य अफसर के रूप में शामिल हुए। उन्होंने हंसी भरे अंदाज में कहा कि हर पीढ़ी में रैंक में तरक्की हो रही है। वह द्वारसू, बागेश्वर के रहने वाले हैं।

रोहित ने चुनी भारतीय सेना

आईएमए में कड़े प्रशिक्षण और पासिंग आउट परेड पास करके हल्द्वानी के रोहित जोशी भी भारतीय सेना का हिस्सा बने। रोहित जोशी ने कहा कि उन्हें भारत माता की रक्षा करने का अवसर मिला है। वह सौभाग्यशाली हैं। उनके छोटे भाई रजत जोशी नेवी में सेवाएं दे रहे हैं और उन्होंने भारतीय सेना को चुना। पिता ने बताया कि उनके दोनों बेटे रक्षा सेनाओं में शामिल हुए हैं। यह उनके लिए गौरवशाली क्षण है। पिता पेशे से फार्मेसिस्ट हैं। रोहित ने निर्मला कॉन्वेंट हल्द्वानी से पढ़ाई की है। वह हिम्मतपुर मल्ला हल्द्वानी के रहने वाले हैं।

दादा के सपने को शुभम ने किया साकार

अल्मोड़ा के शुभम बिष्ट भारतीय सेना का हिस्सा बनकर बेहद खुश हैं। शुभम ने कहा कि भारतीय सेना का हिस्सा बनना किसी भी भारतीय के लिए गर्व की बात होता है। उन्होंने कहा कि उनके दादा चंद्रमोहन सिंह बिष्ट एयरफोर्स में रहे हैं। दादा ने उनका मार्गदर्शन करने में बहुत मदद की। पिता सुंदर सिंह ने बताया कि वह पेशे से होटल मैनेजर हैं। वह कटारमल के रहने वाले हैं।

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