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Uttarakhand Election : अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए ये नेता, लोस चुनाव में अब तक 600 से ज्यादा की जमानत जब्त

चुनावों के परिणाम आने पर अक्सर इनकी तो जमानत जब्त हो गई, ये तो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए ऐसे शब्द सुनाई देते हैं। दरअसल उम्मीदवार को कोई चुनाव लड़ने के लिए एक तय रकम चुनाव आयोग में जमा करानी होती है। इसे ही जमानत राशि कहा जाता है। अगर कोई उम्मीदवार तय वोट ला पाता है तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अब तक उत्तराखंड में 600 से ज्यादा उम्मीदवारों की जमानतच जब्त हो चुकी है।

600 से ज्यादा नेताओं की जमानत हुई जब्त

उत्तराखंड लोकसभा चुनाव में अब तक चुनाव लड़ चुके एक या दो नहीं बल्कि 600 से ज्यादा नेताओं की जमानत जब्त हो चुकी है। आपको बता दें कि साल 1951 से लेकर साल 2019 तक के चुनाव में प्रदेश के 664 नेता ऐसे रहे हैं जिनकी जमानत जब्त हुई है। सबसे ज्यादा नेताओं की जमानत नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट में जब्त हुई है।

नैनीताल सीट में सबसे ज्यादा जमानत जब्त

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा जमानत नैनीताल-ऊधमसिंह सीट में जब्त हुईं हैं। यहां 175 प्रत्याशियों की जमानत अब तक जब्त हुई है। बता दें कि ये उम्मीदवार अपनी सीट से डाले गए कुल वोटों का छठा हिस्सा भी हासिल नहीं कर पाए। सबसे खास बात तो ये है कि कई दिग्गज नेताओं की भी जमानत जब्त हुई है। जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती के साथ ही पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी, मुन्ना सिंह चौहान समेत अन्य भी शामिल हैं

लोकसभा चुनाव में अब तक 844 नेताओं ने लड़ा चुनाव

बता दें कि प्रदेश की पांच लोकसभा सीटों से अब तक 844 नेताओं ने चुनाव में लड़ा है। जिसमें से 664 नेताओं की जमानत जब्त हुई है। लोकसभा चुनाव लड़ने वाले 78 फीसदी प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए हैं। हरिद्वार से 42 सालों में 150 नेताओं ने चुनाव लड़ा जिसमें से 119 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। बात करें अल्मोड़ा सीट की तो 127 में से 89, टिहरी सीट पर 159 में से 124, पौड़ी गढ़वाल सीट पर 147 में से 141 और नैनीताल सीट पर 208 में से 175 नेता अपनी जमानत नहीं बचा पाए।

मायावती को सिर्फ चार फीसदी मिले थे वोट

आपको बता दें कि साल 1977 में अल्मोड़ा सीट से सांसद रहे मुरली मनोहर जोशी 1980 और 1984 में चुनाव हार गए थे। साल 1984 में हरीश रावत उनके सामने मैदान में उतरे और वो अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। इसी सीट से साल 1989 में भाजपा प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी की भी जमानत जब्त हुई थी।

साल 1991 में बसपा प्रमुख मायावती ने हरिद्वार से चुनाव लड़ा। इस दौरान उन्हें केवल चार फीसदी ही वोट मिले। जबकि इससे पहले 1989 के चुनाव में मायावती को इसी सीट पर 22.63 फीसदी वोट मिले थे। साल 2009 और 1999 के चुनाव में भाजपा नेता मुन्ना सिंह चौहान की सपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन अपनी जमानत नहीं बचा सके।

अभी कितनी है जमानत राशि

बता दें कि लोकसभा चुनाव के लिए जमानत राशि पच्चीस हजार है। साल 1951 के चुनाव में सामान्य प्रत्याशियों की जमानत राशि 500 एससी, एसटी के उम्मीदवारों के लिए 250 रुपए थी। जो वर्तमान समय में सामान्य के लिए 25 हजार और एससी, एसटी के लिए 12500 रुपए है।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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