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उत्तराखंड के इन योद्धाओं को सलाम : कोरोना मरीजों के लिए संजीवनी से कम नहीं ये अस्पताल

हल्द्वानी : कोरोना मरीजों के लिए उत्तराखंड का सुशीला तिवारी अस्पताल किसी संजीवनी से कम नहीं है, यहां के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के चलते कोरोना के 6 मरीज सही होकर अस्पताल से डिस्चार्ज होकर मोती नगर स्थित क्वॉरेंटाइन सेंटर भेज दिए गए हैं। जहां पर वह 14 दिन तक कोरनटाइन रहेंगे। सुशीला तिवारी अस्पताल कोरोना वायरस के लिए वरदान साबित हो रहा है।

6 कोरोना मरीजों अस्पताल से डिस्चार्ज

हल्द्वानी का सुशीला तिवारी अस्पताल जो कोरोना मरीजों के लिए इस समय किसी संजीवनी से कम नहीं है, पिछले 1 महीने से सुशीला तिवारी अस्पताल में 1343 लोगों की स्क्रीनिंग की गई जिसके बाद 124 संदिग्ध लोगों को भर्ती किया गया था जिनमें 13 मरीजों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया, जिसके बाद, अस्पताल के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ इन कोरोना मरीजों का इलाज किया, जिसके बाद 6 कोरोना मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है।

सुशीला तिवारी अस्पताल के प्रचार्य डॉ सीपी भैसोड़ा का कहना है कि प्रशासन और सरकार द्वारा उनको हर सुविधाएं मिल रही हैं जिससे वो कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि अभी अस्पताल में 300 बेड है जो कोरोना मरीजों के लिए लगाए गए हैं यदि यहां की इमरजेंसी सेवा बेस अस्पताल में चली जाती है तो यहां पर 600 बेड हों जाएँगे, ताकि कोरोना मरीजों के बढ़ने पर उनका उपचार हो सके।

 कोरोना मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं पूरा मेडिकल स्टाफ 

वहीं सुशीला तिवारी अस्पताल की नर्सिंग हेड का कहना है की पूरा मेडिकल स्टाफ कोरोना मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं और लगातार उनका हर तरीके से इलाज कर रहे हैं। उनको इलाज के दौरान आने वाली दिक्कतों का नर्सिंग स्टाफ समाधान करता हैं। अस्पताल में भर्ती जमाती कोरोना मरीज उनको पूरा सहयोग दे रहे हैं और उनके साथ किसी भी तरह से दुर्व्यवहार नही कर रहे हैं। वही कल डिस्चार्ज हुए जमाती मरीजों ने अस्पताल के मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर को धन्यवाद भी दिया।

उत्तराखंड की एकमात्र माइक्रो बायोलॉजी लैब यहां

वहीं उत्तराखंड की एकमात्र माइक्रो बायोलॉजी लैब जहां पर कोरोना का टेस्ट किया जा रहा है, उसकी एचओडी डॉ विनीता रावत का कहना है कि यहाँ पर पूरा स्टाफ 24 घंटे काम कर रहा है और प्रतिदिन डेढ़ सौ लोगों की कोरोना वायरस की जांच की जा रही है वही उनका कहना है कि प्रशासन और सरकार द्वारा उन्हें पूरा सहयोग किया मिल रहा है और आगे संसाधन बढ़ाने और मैन पावर को बढ़ाने में विचार किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक संख्या में कोरोना टेस्ट हो सके।

सुशीला तिवारी अस्पताल अक्सर अपनी खराब स्वास्थ्य सेवाओं के लिए चर्चा में रहता था, आज यही सुशीला तिवारी अस्पताल संकट के समय में कोरोना मरीजों के लिये संजीवनी साबित हो रहा है,जिस तरह से कोरोना पॉजिटिव मरीज यहां से ठीक हो रहे है, वो किसी संजीवनी से कम नहीं बस जरूरत है सरकार और प्रशासन को सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए और बेहतर संसाधन जुटाने की, लेकिन सबसे ज्यादा मेहनत यहां दिन-रात एक कर मरीजों को सही करने वाले डॉक्टर कर रहे हैं जो भी काबिले तारीफ है।

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