बड़ी खबर: BJP को झटका, राजनीति छोड़ने के बाद TMC में शामिल हुए बाबुल

पश्चिम बंगाल में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो आज औपचारिक रूप से टीएमसी में शामिल हो गए। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद सुप्रियो ने भाजपा छोड़ दी थी। उन्होंने राजनीति से संन्यास की भी घोषणा की थी। उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने टीएमसी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान सांसद डेरेक ओश्ब्रायन भी मौजूद थे।

टीएमसी के कुणाल घोष ने बाबुल सुप्रियो के TMC में शामिल होने पर कहा, श्श्भाजपा के कई नेता टीएमसी नेतृत्व के संपर्क में हैं। वे भाजपा से संतुष्ट नहीं हैं। एक आज शामिल हुए, दूसरा कल शामिल होना चाहता है। यह प्रक्रिया चलती रहेगी। रुकिए और देखते रहिए। फेसबुक पर राजनीति छोड़ने की घोषणा कर सबको हैरत में डालने के अगले दिन बाबुल सुप्रियो ने कहा था कि उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की, लेकिन उन्होंने अपने अगले कदम के बारे में अभी कोई निर्णय नहीं लिया है।

आसनसोल के सांसद ने एक टीवी चौनल से कहा कि भविष्य में मैं क्या करता हूं यह तो वक्त ही बताएगा। सुप्रियो ने संकेत दिया था कि इस्तीफे का निर्णय आंशिक रूप से उन्होंने मंत्री पद जाने और भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के नेतृत्व के साथ मतभेदों के कारण लिया था। आसनसोल से दो बार के सांसद सुप्रियो उन कई मंत्रियों में शामिल थे, जिन्हें 7 जुलाई को एक बड़े फेरबदल के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटा दिया गया था।

गायकी से करोड़ों दिलों को जीतने के बाद राजनीति में सात साल की पारी के अंत का ऐलान करते हुए आसनसोल से बीजेपी सांसद और पूर्व मंत्री बाबुल सुप्रियो ने यह भी खुलासा किया था कि वह क्यों और कैसे भगवा दल में शामिल हुए थे। बाबुल सुप्रियो ने कहा था कि योगगुरु बाबा रामदेव के कहने पर उन्होंने बीजेपी जॉइन की थी और उस समय पार्टी को बंगाल में एक भी सीट मिलने की उम्मीद नहीं थी। बाबुल सुप्रियो ने लिखा था, श्श्स्वामी रामदेव से संक्षिप्त बातचीत हुई थी। मुझे यह अच्छा नहीं लगा कि बीजेपी बंगाल को इतनी गंभीरता से ले रही थी, लेकिन उसे एक भी सीट मिलने की उम्मीद नहीं थी।

मैंने सोचा कि यह कैसे हो सकता है कि जो बंगाल श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी का इतना सम्मान करता है वह बीजेपी को एक भी सीट देने से इनकार कर दे। खासकर तब जब पूरे भारत ने चुनाव से पहले तय कर लिया था कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे, बंगाल क्यों अलग सोचेगा। तब मैंने एक बंगाली के रूप में चुनौती स्वीकार की। सबकी सुनी, लेकिन किया वह जो मेरे दिल ने कहा, बिना कल की चिंता किए।

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