
देहरादून : गांधी नेत्र चिकित्सालय में लैब सहायक के पद पर कार्यरत संदीप गुप्ता पैथोलोजी मरीजों के सैम्पल लेने का कार्य करते हैं। वो कहते हैं कि मन में अगर कुछ करने की चाह हो तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। जज्बे और जज़्बातो को रोक पाना मुश्किल होता है और यह काम समाज के लिए होतो बेचेनी उसे सोने नहीं देती। कोरोना युद्ध के समय जब हर ओर से चिन्ता में डालने वाली खबरें आ रही थीं तो स्वयं को सामान्य रख पाना बहुत मुश्किल होता है।
मजदूरों की परेशानियों को जाना, पहुंचाया खाना
उन्होंने बताया कि चिकित्सालय से घर जाते समय उन्होंने देखा कि हरिद्धार रोड पर कुछ मजदूर भीड़ लगाकर खड़े थे। तो उन्होंने मजदूरों से बात की तो वो लॉकडाउन के बाद से खाने को लेकर परेशानियों को बताने लगे। कहा कि उस दिन जब मैं घर आया तो रात भर सो नहीं सका और सोचता रहा कि इस मुसीबत की घड़ी में वो क्या कर सकते हैं। उन्होंने धर्मपत्नी को सारी बताई। सुबह हुई थी कि पत्नी-पति ने मिलकर खाना पकाया औऱ भोजन के पेकेट बनाए। लेकिन फिर औरों का ख्याल आया कि न जाने ऐसे कितने लोग भूखे होंगे। कुछ भोजन लेकर जरुरतमंदों तक पहुंचाया पर यह काफी नहीं था। फिर अपनी सस्था टीम मैं हूँ सेवादार के साथियों से बात कर जरुरतमंदों की बढ़ती सख्या को भोजन का सहयोग करने की बात कही। जिसके बाद ज्यादा मात्रा मे भोजन बनाने का तय हुआ।
ये भी उन कोरोना योद्धाओं में ही शामिल हैं जो दिन रात ड्यूटी कर रहे हैं और लोगों को इस घातक वायरस से बचा रहे हैं। आज नियमित रूप से संदीप गुप्ता 150 भोजन के पेकैट 20 दिनों से पहुंचा रहे हैं और अब तक 400 सूखा राशन के पैकेट जरुरत मंदों को बांट चुके हैं। उनका कहना है कि देश हमें सब कुछ देता है तो हम भी तो कुछ देना सीखें।
‘मैं हूं सेवादार’ संस्था से जुड़े हैं संदीप गुप्ता
आपको बता दें कि देहरादून से संदीप गुप्ता ‘मैं हूं सेवादार’ संस्था से जुड़े हैं जो की देश भर में घूमकर खाने की बर्बादी को रोकने का संदेश लोगों को दे हैं। उनका कहना है कि उतना ही लो थाली में जो व्यर्थ न जाए नाली में।