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पहले अस्थि विसर्जन से लौटे परिवार का हुआ एक्सीडेंट, 7 की मौत…,फिर उनके अंतिम संस्कार में गए 7 लोग डूबे

राजस्थान के भीलवाड़ा और जयपुर से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। जिसे सुनकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा के फूलिया कला गांव में पिछले सात दिनों के भीतर ऐसे हादसे हुए कि एक ही परिवार की चार पीढ़ियां खत्म हो गईं। गांव में इतने कम समय में एक के बाद एक हुई इतनी मौतों ने सबको हिला दिया है। चलिए जानते है पूरा मामला आखिर है क्या?

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परिवार का हुआ एक्सीडेंट, सात की मौत

दरअसल ये घटना 14 सितंबर की है। सुबह जयपुर के शिवदासपुरा इलाके में रिंग रोड पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ। फूलिया कला गांव के अशोक वैष्णव (47), उनकी पत्नी सीमा (45), बेटा रोहित (23) और पोता गजराज (6) सहित जयपुर निवासी रामराज वैष्णव (38), उनकी पत्नी मधु (36) और डेढ़ साल का बेटा रुद्र—all सात लोग कार हादसे में जान गंवा बैठे।

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अस्थि विसर्जन से लौट रहा था परिवार

दरअसल ये सभी हरिद्वार से गोपाल वैष्णव (अशोक के पिता) की अस्थियां विसर्जन कर लौट रहे थे। ओवरस्पीड कार रिंग रोड पर डिवाइडर से टकरा गई। जिससे 16 फीट नीचे अंडरपास में भरे पानी में जा गिरी। रविवार दोपहर जब स्थानीय लोगों ने कार देखी तो पुलिस को सूचना दी गई। क्रेन की मदद से कार बाहर निकाली गई। जिसमें सात शव मिले।

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अंतिम संस्कार के बाद नदी में डूबे सात युवक

अगले दिन चारों शव गांव पहुंचे। सुबह श्मशान घाट पर अशोक, सीमा, रोहित और गजराज का अंतिम संस्कार किया गया। परंपरा के मुताबिक ग्रामीण अंतिम संस्कार के बाद खारी नदी के एनिकट में नहाने गए। इसी दौरान सात युवक गहरे पानी में डूब गए।

लोगों ने बचाव अभियान चलाया और चार को सुरक्षित बाहर निकाला। लेकिन इस दौरान दो युवकों महेंद्र माली और बरदी चंद की डूबने से मौत हो गई। तो वहीं महेश नाम का युवक अभी भी लापता है। बाकियों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

सात दिनों में एक ही परिवार की चार पीढ़ियां खत्म

गांववालों के मुताबिक महज एक हफ्ते में इस परिवार से चार पीढ़ियां खत्म हो गईं। पहले गोपाल वैष्णव का निधन हुआ। फिर उनके बेटे अशोक, बहू सीमा, पोता रोहित और पड़पोता गजराज इस हादसे के शिकार हो गए।

अशोक धनेश्वर मंदिर में पुजारी का काम करते थे। जबकि उनका बेटा रोहित किराना दुकान संभालता था। रोहित के तीन बच्चों में से एक गजराज अब इस दुनिया में नहीं रहा। परिवार में अब अशोक का बड़ा बेटा पंकज ही इकलौता सहारा बचा है।

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