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शहीद के नाम की सड़क भी सालों से खराब, क्या यही है सपनों का उत्तराखंड ?

chima village story lohaghat lakshaman singh

 

वीरों के राज्य उत्तराखंड में भी जब शहीदों और सैन्य कर्मियों के प्रति सरकारी लापरवाही सामने आती है तो सवाल उठने लाजमी हैं।

ऐसी ही एक लापरवाही बाराकोट ब्लाक के दूरस्थ चामी गांव से सामने आई है। चामी – खेती काकड़ी की सड़क पिछले लगभग पांच सालों से बदहाल पड़ी है। ये सड़क शहीद लांस नायक श्याम सिंह बिष्ट के नाम पर है।

गड्ढ़ों और कीचड़ से भरी 

इस सड़क की हालत ऐसी हो गई है कि गड्ढ़ों और कीचड़ में पूरी सड़क गायब सी हो गई है। इस सड़क पर पैदल चलने वालों की छोड़िए वाहनों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

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इस सड़क के निर्माण के लिए कई बार गुहार लगाई गई लेकिन अधिकारी हैं कि सुनने को तैयार नहीं हैं। चामी गांव के प्रधान प्रकाश महर कहते हैं कि सरकार और अधिकारियों का पूरा ध्यान सिर्फ शहीद के नाम का बोर्ड लगाने पर था। सड़क को बनाने के प्रति किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं दिखती है। महर बताते हैं कि कई बार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से सड़क निर्माण के लिए अनुरोध किया गया लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी। एक किलोमीटर का डामरीकरण कर आगे का काम छोड़ गए।

स्वीकृति का इंतजार 

वहीं विभाग के अधिकारी बीसी भंडारी बताते हैं कि लगभग ढाई किलोमीटर का काम बाकी है। इसके निर्माण के लिए इस्टीमेट बना लिया गया और शासन में स्वीकृति के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरु कर दिया जाएगा।

वहीं शहीद के नाम की सड़क की बदहाली से स्थानीय लोग न सिर्फ नाराज हैं बल्कि अब आंदोलन की चेतावनी भी दे रहें हैं।

लोहाघाट से लक्ष्मण बिष्ट से मिले इनपुट्स के साथ

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