
PM Modi Assassination Plan: दुनियाभर में अमेरिका की खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) अपने कुख्यात कारनामों के लिए विख्यात है। बता दें कि ये एजेंसी शासन-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देती है। साथ ही नागरिक विद्रोहों को भड़काने, वैध सरकारों को गिराने में माहिर है। यानी कि ये जियो-पॉलिटिकल समीकरण बदलने का दम रखती है। सीआईए की सक्रियता दक्षिण एशिया में कोई नई बात नहीं है। हालांकि अब इसके भारत को निशाने बनाने की खबर सामने आ रही हैं।
दक्षिण एशिया में CIA पहले से एक्टिव
बताते चलें कि दक्षिण एशिया की राजनीति में अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA की भूमिका कोई नई बात नहीं है। 1979 में सोवियत संघ के अफगानिस्तान पर हमले के दौरान जिस तरह अमेरिका ने मुजाहिदीन को समर्थन देकर स्थिति को बदलने की कोशिश की थी, उसी दौर से इसकी जड़ें और गहरी होती गईं।
आज भी बांग्लादेश की राजनीति में लगातार जारी अस्थिरता हो या नेपाल में सत्ता संतुलन के बार-बार बदलते समीकरण। कई विश्लेषक मानते हैं कि परदे के पीछे CIA जैसी ताकतें दक्षिण एशिया की राजनीतिक दिशा-निर्देशक बनी हुई हैं।
ढाका में अमेरिकी अधिकारी की रहस्यमयी मौत
Organiser.org की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 31 अगस्त को एक होटल में अमेरिका का स्पेशल फोर्सेज ऑफिसर टेसेंस अर्वेल जैक्सन की रहस्यमयी मौत हो गई। इस मौत से दक्षिण एशिया में अमेरिकी ख़ुफ़िया गतिविधियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। अनुमान या यू कहे कि शक जताया जा रहा है कि क्या अमेरिकी अधिकारी को भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के मिशन पर भेजा गया था?
PM मोदी की हत्या का था प्लान!
कई एक्सपर्ट्स और खबरों की माने तो पीएम मोदी की हत्या की साजिश रची गई थी। रुस की खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर भारत ने इसे विफल कर दिया।
जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट अमेरिकी अधिकारी की मौत को इसी से जोड़ रहे हैं। कई एक्सपर्ट्स की माने तो टेरेंस जैक्सन को बांग्लादेश सेना को प्रशिक्षित करने के बहाने से वहां भेजा गया था। लेकिन उसका मकसद कुछ और ही था।
मोदी-पुतिन की गुप्त बातचीत और उसी दिन हुई मौत
टेरेंस अर्वेल जिस दिन मृत पाए गए उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होने गए थे। इसी दौरान मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russia President Vladimir Putin) एक साथ कार में गए थे।

इस खबर ने काफी सुर्खियां बटौरी थी। इसी दौरान उनके बीच 45 मिनट तक निजी बातचीत हुई। एक्सपर्ट्स कीमाने तो इस दौरान दोनों नेता इसी साजिश और गुप्त ऑपरेशन की चर्चा कर रहे थे। इसी के रिजल्ट में अमेरिकी अधिकारी को ढाका में मारा गया।
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मोदी का रहस्यमयी बयान
इसके साथ ही हाल ही में पीएम मोदी ने भी रहस्यमयी बयान दिया। जिसने इन अटकलों को और भी ज्यादा बल दिया। उन्होंने कहा कि, “क्या आप इसलिए ताली बजा रहे हैं कि मैं वापस आ गया?”

दरअसल दो सितंबर को पीएम मोदी ने एक बयान दिया। चीन से लौटने के अगले दिन उन्होंने कहा कि, “क्या आप इसलिए ताली बजा रहे हैं क्योंकि मैं चीन गया था या इसलिए क्योंकि मैं वापस आ गया?” विशेषज्ञों का मानना है कि ये टिप्पणी इस बात का संकेत देती है कि वो किसी खतरे से गुजरे थे।
हालांकि खबर उत्तराखंड इसकी पुष्टि नहीं कर सकता है। लेकिन अगर ये रिपोर्ट सच है तो भारत-अमेरिका के संबंध काफी प्रभावित हो गए है।