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हर चीड़ आच्छादित क्षेत्रीय रेंज में बनेगी ब्रिकेट और पैलेट यूनिट, अब पिरूल से ऐसे होगी कमाई

चीड़ पिरूल एकत्रीकरण को मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है। इसके लिए अब हर चीड़ आच्छादित क्षेत्रीय रेंज में एक ब्रिकेट और पैलेट यूनिट की स्थापना की जाएगी। जिस से लोगों को पिरूल को बेचने में आसानी हो। इसके साथ ही उद्यमियों द्वारा उनका विक्रय भी आसानी से हो।

पिरूल एकत्रीकरण को किया जा रहा मिशन मोड में संचालित

सीएम धामी ने प्रदेश में कुशल वनाग्नि प्रबन्धन हेतु चीड़ पिरूल एकत्रीकरण को मिशन मोड में संचालित किए जाने के निर्देश दिए गए थे। कुशल वनाग्नि प्रबन्धन के दृष्टिगत चीड़ पिरूल एकत्रीकरण को महत्वपूर्ण मानते हुए प्रत्येक चीड़ आच्छादित वन प्रभाग में चीड़ पिरुल एकत्रीकरण हेतु लक्ष्य निर्धारित किए जाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए थे। सीएम के निर्देशों के बाद इसे मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है।

हर चीड़ आच्छादित क्षेत्रीय रेंज में एक ब्रिकेट और पैलेट यूनिट

अपर प्रमुख वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि हर चीड़ आच्छादित क्षेत्रीय रेंज में एक ब्रिकेट और पैलेट यूनिट की स्थापना सुनिश्चित की जाए। क्षेत्रीय प्रभागीय वनाधिकारी, अल्मोड़ा, चम्पावत, गढ़वाल, बागेश्वर, मसूरी, लैंसडौन, नैनीताल, सिविल अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, टिहरी, टौंस, पिथौरागढ़, अपर यमुना बड़कोट, नरेन्द्रनगर, हल्द्वानी, रुद्रप्रयाग, चकराता, बद्रीनाथ, रामनगर एवं सिविल सोयम कालसी वन प्रभाग को निर्देशित किया गया है कि पिरूल एकत्रीकरण को मिशन मोड में क्रियान्वित करने के लिए ये आवश्यक है कि हर चीड़ आच्छादित क्षेत्रीय रेंज में एक ब्रिकेट और पैलेट यूनिट की स्थापना सुनिश्चित की जाए। ताकि एकत्रित पिरूल का प्लांट में उपयोग होकर ब्रिकेट और पैलेट उत्पादित किए जा सके। इसके साथ ही संबंधित उद्यमियों द्वारा उनका विक्रय किया जा सके।

अब पिरूल से ऐसे होगी कमाई

अपर प्रमुख वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन ने कहा है कि पिरूल एकत्रकरण से पिरूल के वन क्षेत्रों से हटने से वनाग्नि की घटनाओं में कमी आएगी। इसके साथ ही स्थानीय संग्रहणकर्ताओं को आय अर्जित होगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

रेंजवार पिरूल एकत्रीकरण लक्ष्य 5000 हेक्टेयर में लक्ष्यों की पूर्ति हेतु न्यूनतम एक ब्रिकेट व पैलेट यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने सभी वन क्षेत्राधिकारियों से जिला स्तर पर उद्योग और ग्रामीण विकास विभाग के संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुये उद्यमियों का चयन कर उन्हें राज्य सरकार व वन विभाग से दी जाने वाली सुविधाओं और सहयोग के विषय में जागरूक करेंगे एवं इन यूनिटों की स्थापना सुनिश्चित कराएंगे।

तीन महीने में स्थापित किए जाएं ब्रिकेट और पैलेट यूनिट

बता दें कि जारी निर्देशों में ये भी स्पष्ट किया गया है कि प्रभागीय वनाधिकारी अपने प्रभाग के अंतर्गत ब्रिकेट और पैलेट यूनिटों की स्थापना सम्बन्धी कार्यवाही तीन माह (सितम्बर 2024 तक) में पूर्ण करते हुए अनुपालन आख्या उपलब्ध कराएंगे। सम्बन्धित मुख्य वन संरक्षकों व वन संरक्षकों द्वारा वन क्षेत्राधिकारियों द्वारा की जा रही कार्रवाई की प्रत्येक 15 दिन में समीक्षा किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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