किशोर का छलका दर्द, कहा-जिनको मैनें कंधे पर बैठाकर राजनीति में सर्पोट किया, उन्होंने ही मेरे पांव काटने की कोशिश की

टिहरी : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर उपाध्याय का एक बार फिर से दर्द छलका। उन्होंने कहा कि जिनको मैनें कंधे पर बैठाकर राजनीति में सर्पोट किया, उन्होंने ही मेरे पांव काटने का काम किया और मुझे राजनीतिक तौर पर 17 से 18 बार हानि पहुंचाई। कहा कि मुझे हानि पहुंचाने वालों को जनता अब उसका हिसाब देगी।

आपको बता दें कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के द्वारा सोशल मीडिया पर किशोर के प्रति कटाक्ष और प्रतिक्रिया दी जाती रही है। उससे लगता है कि उत्तराखंड के कांग्रेस पार्टी में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। कहीं ना कहीं पार्टी में अनबन चल रही है। कहीं न कही हरीश रावत और किशोर उपाध्याय के बीच कुछ ना कुछ अनबन चल रही है जिसका खामियाजा कोंग्रेस पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

किशोर उपाध्याय से जब पूछा गया कि आखिर हरीश रावत के द्वारा हमेशा सोशल मीडिया पर किशोर उपाध्याय के खिलाफ कटाक्ष क्यों किया जाता है? उस पर किशोर उपाध्याय ने शालीनता से जबाब देते हुए कहा कि हरीश रावत की यह अच्छी बात है जो मुझे हमेशा सुर्खियों में रखते हैं। हरीश रावत हमारे बड़े भाई हैं और किशोर उपाध्याय के लिए यह बड़ी अच्छी बात है। क्योंकि किशोर उपाध्याय ने अपने कंधों पर चढ़ाकर जिन लोगों को आगे बढ़ाने का काम किया उसने कोशिश की कि वह किशोर उपाध्याय के पांव काट दें लेकिन मेरे ऊपर मां भगवती की कृपा रही कि कोई  व्यक्तिगत नुकसान नहीं पहुंचा सका।

कहा कि मुझे उस तरह से हानि नहीं पहुंचा पाए जैसे वह चाहते थे, हां लेकिन राजनीतिक रूप से  16-17 बार हानि पहुंचा दी। किशोर ने कहा कोई बात नहीं मैं उसका कोई बुरा भी नहीं मानता हूं और वह हमारे वरिष्ठ साथी व  बड़े भाई हैं। हम पारिवारिक रूप से एक है ,लेकिन राजनीति रूप में मैं अलग हो सकता हूं और वह मेरे बड़े भाई हैं और मैं उनका आदर भी करता हूं और सम्मान भी करता हूं। आगे हरीश रावत पारिवारिक हिसाब से अगर मुझे कोई सुझाव भी देंगे तो निश्चित रूप से उन्हें मानेंगे,लेकिन राजनीति रूप में में अलग हूं और  राजनीतिक रूप से मुझे कोई सुझाव देंगे तो वहां मैं मानूँगा या नहीं मानूंगा वह मेरा निर्णय है।

और यह अलग बात है राजनीति तोर पर वह हमारे वरिष्ठ नेता हैं और सभी को उनका आदर और सम्मान करना चाहिए

 वह किशोर उपाध्याय ने कहा कि राहुल गांधी के द्वारा जो बुलावा दिया गया था वह मुझे देर से मिला और मैं इसलिए नहीं जा पाया कि मेरे परिवार में शादी थी और मेरे लिए पहले अपने सगे संबंधी है, मैंने 50 साल की राजनीति में ना परिवार देखा ना सगे संबंध देखे यहां तक कि मैं अपने भांजे और भांजी की शादी में भी नहीं जा सका और ना ही मैं क्षेत्र के कई लोगों की शादी में नहीं जा पाया और इसका मुख्य कारण था कि पार्टी का कहीं ना कहीं चुनाव व कार्यक्रम होते रहते थे जिस कारण में अपने सगे संबंधियों से नहीं मिल सका और न समय दे पाया,

और मैं इस उम्र में यह चाहता हूं कि अपने पुराने संबंधों को पुनर्जीवित कर सकूं और अगर पुराने संबंधों को पुनर्जीवित नहीं करेंगे तो वह संबंध मर जाते हैं और कई मेरे खास अपने परिचित लोग नाराज होने के कारण बात ही नहीं करते हैं और कहते हैं कि आप पार्टी के ही कामों में व्यस्त हैं और अपने सगे संबंधियों के लिए समय नहीं है, इसलिए मैं इस समय अपने के बीच जाकर अपने पुराने संबंधों को पुनर्जीवित कर रहा हूं और इन संबंधों को जीवित करने मैं व्यस्त हूं और आगे समय आने पर जल्दी राहुल जी से मिलूंगा कि फिर आगे की क्या रणनीति बनती है

राजनीति को लेकर एक विचार विमर्श चल रहा है कि जो वन अधिकार आंदोलन को समर्थन देगा ओर लागू करेगा जिससे उत्तराखंड व उत्तराखंडतियो को देने का काम करेगा मैं उनके साथ खड़ा हूं।

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