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नाकारा चमोली प्रशासन, दो महीने में नहीं बन पाए चार प्री फैब्रिकैटेड हट

जोशीमठ में भू-धंसाव लगातार चिताओं का विषय बना हुआ है। लगातार भू-धंसाव को लेकर बैठकें की जा रही है। लेकिन जब आपदा प्रभावितों के रहने पर सवाल उठे तो सरकार ने तुरंत मुआवजे और तत्काल राहत की व्यवस्था करने के आदेश दिए। आपदा प्रभावितों के रहने के लिए फैब्रिकेटेड हट देने की बात की गई। लेकिन आपदा के दो महीने बीत जाने के बाद भी चार प्री फैब्रिकैटेड हट भी बनकर तैयार नहीं हुए हैं।

आपदा के दो महीने के बाद भी नहीं बन पाए चार प्री फैब्रिकैटेड हट

जोशीमठ में भू धंसाव जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है तो वहीं लोगों की जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई और जान माल पर बन आयी है। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और पूरे देश के लोग जोशीमठ आपदा को लेकर चिंतित हो रहे हैं। हजारों लोगो के रहने और रोजगार पर जब संकट खड़ा हुआ तो सरकार ने मुआवजे और तत्काल राहत की व्यवस्था करने के आदेश दिए ।

लेकिन जोशीमठ से कोसों दूर जिला मुख्यालय में बैठे प्रशासन के आक़ाओं को मुख्यमंत्री की अगवानी और मुख्यमंत्री से वाहवाही लूटकर कलक्टरी बचाये रखना ही सबसे महत्वपूर्ण नजर आ रहा है। जब जोशीमठ आंदोलन जोरों पर था तो जिला प्रशासन ने प्री फैब्रिकेटेड मकानों के शिगूफा छोड़ कर मुख्यमंत्री से वाह वाही लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन हकीकत में सूरत ए हाल ये है कि जमीन पर अभी 4 फैब्रिकेटेड हट भी तैयार नहीं है।

एक प्री फैब्रिकैटेड हट तीन से चार दिन में हो जाता है तैयार

प्रभावितों को आपदा के दो महीने बाद भी चार फैब्रिकेटेड हट भी तैयार करके नहीं सौंपें गए हैं। जबकि एक प्री फैब्रिकैटेड हट को बनने में तीन से चार दिन का समय उपयुक्त रहता है। चमोली जिला प्रशासन की शुतुरमुर्गी आंखों का खामियाजा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपनी छवि में गिरावट के रूप में जोशीमठ में झेलना पड़ रहा है। अगर ऐसे ही सुस्त कलक्टरों से कलक्टरी करवा कर सीएम धामी को अपनी छवि धूमिल करवानी है तो सुस्त कलक्टर और नाकारा प्रशासन जिंदाबाद।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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