
उत्तराखंड में होमगार्ड वर्दी खरीद प्रकरण को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस ने इस मामले को केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि गंभीर संवैधानिक और आपराधिक उल्लंघन करार दिया है। कांग्रेस के प्रवक्ता अभिनव थापर ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि होमगार्ड वर्दी मामला शासन-प्रशासन की मिलीभगत और संगठित भ्रष्टाचार का उदाहरण बन चुका है।
होमगार्ड वर्दी घोटाले में विपक्ष ने सरकार को घेरा
अभिनव थापर ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसमें सरकारी खरीद नियमों, उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली 2017, वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के गंभीर उल्लंघन की स्पष्ट संभावना है। ऐसे मामलों में केवल निलंबन की कार्रवाई औपचारिकता भर होती है, जबकि वास्तविक जरूरत एफआईआर दर्ज करने, संपत्ति की जांच कराने और स्वतंत्र एजेंसी से आपराधिक जांच की है।
सरकार ने अधिकारी तक सिमिति कर दिया मामला: थापर
थापर ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर पूरे मामले को एक अधिकारी तक सीमित कर दिया, जबकि किसी भी सरकारी खरीद प्रक्रिया में टेंडर समिति, लेखा अधिकारी, वित्तीय स्वीकृति देने वाले अधिकारी और विभागीय सचिव की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। एक व्यक्ति को निलंबित कर देना पूरे घोटाले को ढकने का पारंपरिक प्रशासनिक तरीका है, जिससे बड़े स्तर पर जिम्मेदार लोगों को बचाया जा सके।
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अभिनव थापर ने होमगार्ड वर्दी घोटाले में सामने आई दरों को अपने आप में आपराधिक साक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि 130 रुपए का डंडा 375 में, 500 के जूते 1500 में, 1200 की पैंट-शर्ट 3000 में और 500 की जैकेट 1580 रुपये में खरीदी गई। यह सामान्य महंगाई नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से सरकारी धन की लूट और आपराधिक साजिश का संकेत है।
किसके आदेश से हुआ भुगतान: कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता ने सबसे गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार आज तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि सप्लायर कौन था, टेंडर किस आधार पर दिया गया, रेट अप्रूवल किस अधिकारी ने किया और भुगतान किसके आदेश से हुआ। जब तक ये सभी तथ्य सार्वजनिक नहीं किए जाते, तब तक यह साफ है कि सरकार पारदर्शिता के बजाय संगठित संरक्षण की नीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस का आरोप एक अधिकारी को बनाया बलि का बकरा
थापर ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में ईमानदार होती तो इस मामले में निलंबन की जगह FIR दर्ज होती, विभागीय जांच की बजाय न्यायिक जांच कराई जाती और केवल छोटे अधिकारियों को नहीं, बल्कि पूरी फाइल चेन को कटघरे में खड़ा किया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा स्थिति में एक अधिकारी को बलि का बकरा बनाकर पूरा सिस्टम खुद को कानूनी दायरे से बाहर रखने की कोशिश कर रहा है। यह शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि राज्य प्रायोजित प्रशासनिक लूट का मॉडल बनता जा रहा है।
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