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हरिद्वार में 4 अवैध मदरसे हुए सील, अब तक उत्तराखंड में कितने मदरसों पर लगा ताला?

Haridwar News: सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर एक बार फिर जिला प्रशासन ने अवैध मदरसों पर ताला लगाए जाने का अभियान तेज कर दिया है। आज भी हरिद्वार के चार अवैध मदरसों को सील किया गया है। सीएम धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद राज्यभर में चल रही कार्रवाई के तहत अब तक कुल 222 अवैध मदरसे सील किए जा चुके हैं। तो वहीं हरिद्वार में अवेध मदरसों की संख्या 85 हो गई है।

हरिद्वार में 4 अवैध मदरसे हुए सील

हरिद्वार में आज चार और अवैध मदरसों पर ताला लगा दिया गया है। जिससे जिले में कुल सील किए गए मदरसों की संख्या 85 हो गई है। सीएम धामी के नेतृत्व में ये मुहिम शुरू की गई। ये ना केवल कानून-व्यवस्था बल्कि प्रदेश के सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक भी बन चुकी है।

मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ये स्पष्ट कर चुकी है कि उत्तराखंड की धरती पर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, मजहबी कट्टरता या शिक्षा के नाम पर भ्रम फैलाने वाली व्यवस्था को सहन नहीं किया जाएगा।

उत्तराखंड कई मदरसों पर लगा ताला

अवैध मदरसे सील किए जाने की इस लिस्ट में अब तक ऊधम सिंह नगर में 66, देहरादून में 44, नैनीताल में 24, पौड़ी में दो और अल्मोड़ा में एक मदरसा में ताला लगा दिया गया है। ऐसे में अब तक टोटल 222 अवैध मदरसे को उत्तराखंड में सील कर दिया गया है।

सीएम घामी के कड़े निर्देश

मुख्यमंत्री धामी ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि जहां कहीं भी अवैध रूप से मदरसे संचालित हो रहे हैं वहां तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए। ये मुहिम उत्तराखंड सरकार के उस संकल्प को दर्शाती है जिसके तहत प्रदेश को कानून व्यवस्था के दृष्टिकोण से पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा रहा है। सरकार की सख्ती और प्रशासन की तत्परता इस दिशा में एक बड़ा संदेश दे रही है कि कानून तोड़ने वालों के लिए उत्तराखंड में कोई जगह नहीं। संविधान और संस्कृति दोनों की रक्षा के लिए सरकार संकल्पित भाव से कार्य कर रही है।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल मीडिया से जुड़ी युवा पत्रकार उमा कोठारी इस समय खबर उत्तराखंड.कॉम के साथ काम कर रही हैं। उमा अलग-अलग बीट पर खबरें लिखती हैं, जिनमें देश-दुनिया की राजनीतिक गतिविधियों की अहम खबरें, मनोरंजन, खेल और ट्रेंड से जुड़ी अपडेट शामिल हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए वे ट्रेंड और तथ्य दोनों का संतुलन बनाए रखती हैं, ताकि पाठकों तक सही और ज़रूरी जानकारी पहुंचे।
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