
देहरादून: स्वर्गीय गोपाल बाबू गोस्वामी ने “जय-जय हो देवभूमि” गाना गया था। ये ऐसा गाना है, जिसमें संपूर्ण उत्तराखंड की बात है। उत्तरखंड की लोक संस्कृति से लेकर चारधामों और हिमालय के हर कण, हर कोने को पिरोया गया है। इस गाने को फिर जीवंत किया है मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने। उन्होंने अपने आवाज से इस गाने में नई जान फूंक दी। इतना ही नहीं, इस गाने को शानदार ढंग से फिल्माया भी गया है। गाना कल यानि 23 दिसंबर को लॉन्च होगा।
उत्तराखंड के लोकगीतों की श्रेणी में पहली बार एक ऐसा गीत नए रूप में लॉन्च होने जा रहा है जिसमें आपको संपूर्ण उत्तराखंड दर्शन हो जाएंगे। गाना पहले ही शोसल मीडिया में धमाल मचा चुका है। हजारों लोग गाने को देख चुके हैं। इसका वीडियो ट्रेलर सीएम के मीडिया सलाहकार और गाने को आवाज देने वाले रमेश भट्ट ने अपनी फेसबुक वॉल पर शेयर किया। कुछ ही घंटों में इसे हजारों की तादाद में लोगों ने देखा।
गाने में गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार बावर की झलकगीत में उत्तराखंड के अध्यात्म, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन के साथ साथ संपूर्ण उत्तराखंड के सौंदर्य को दर्शाया गया है। पहली ही नजर में देखने और सुनने में गीत अपने मूल के साथ दर्शकों के दिलोदिमाग पर छा रहा है। उत्तराखंड के गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार बावर का बेहतरीन चित्रण इस गीत में है। देवभूमि के चारों धामों के साथ साथ गीत में तमाम छोटे-बड़े प्रसिद्ध सिद्धपीठों और पर्यावरणीय संतुलन का भी का सजीव चित्रण है। गीत में उच्च हिमालयी क्षेत्र और यहां के जीवन के अदभुत दर्शन होते हैं।
रमेश भट्ट ने कहा कि सबसे पहले मेरी श्रद्धांजिल स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी जी को। वे हमेशा मेरे प्रेरणाश्रोत रहे हैं। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीरा गोस्वामी जी का भी बहुत बहुत आभार, जिन्होंने मुझे इस रचना को गाने की अनुमति दी। रमेश भट्ट ने कहा कि मैं गीत के फिल्मांकन और सहयोग के लिए पटवाल फिल्म्स का भी कृतज्ञ हूं। भरोसा है आप सबको ये पसंद आएगा।