
कर्नल अजय कोठियाल के धराली पर दिए बयान के बाद प्रदेश की सियासत अचानक तेज हो गई है। कोठियाल का बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ प्रदेश अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता धराली पहुंचे थे। वहां से लौटने के बाद विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
आपदा को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
कर्नल कोठियाल के बयान ने न सिर्फ सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए, बल्कि कांग्रेस को भी मौके पर उतरने का मौका दिया। यही वजह है कि कांग्रेस नेताओं की टीम धराली पहुंची और आपदा प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद कांग्रेस नेता देहरादून लौटे और इसके तुरंत बाद प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को घेरा। उन्होंने 5 अगस्त को हर्षिल, थराली और आसपास के क्षेत्रों में आई आपदा पर सरकार की भूमिका पर तीखे सवाल उठाए।
गोदियाल ने दावा किया कि आपदा के दिनों में कांग्रेस के हर एक कार्यकर्ता इलाके में मौजूद था और लोगों को राहत पहुंचाने में जुटा हुआ था, लेकिन सरकार और प्रशासन ने उनके कार्यकर्ताओं को प्रभावित क्षेत्रों में जाने से रोकने की कोशिश की। गोदियाल ने कहा कि चार महीने बाद कोठियाल ने खुद अपनी सरकार के सामने सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि 147 लोग मलबे में फंसे होने की पुष्टि हुई थी, जिनकी बॉडी आज तक नहीं मिल सकी।
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हर्षिल पहुंचने से पहले ही ही कर दी इंटरनेट सेवा बंद: गोदियाल
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कर्नल कोठियाल ने जो बातें आज कही हैं, वही बातें करण महारा चार महीने पहले कह चुके थे। उन्होंने बताया कि जब वे कल हर्षिल जाने वाले थे, तो हर्षिल पहुंचने से करीब 15 किलोमीटर पहले ही सरकार ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी। स्थानीय लोगों से बातचीत में भी यही बात निकलकर आई कि करीब 150 लोग मलबे में दबे थे, जिनकी खोजबीन आज तक पूरी नहीं हो पाई।
मुआवजे की जिम्मेदारी से सरकार ने झाड़ा पल्ला
गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार आज तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि वह प्रभावित लोगों को बचाने के लिए आगे क्या कदम उठाने जा रही है। प्रभावित परिवारों को 5 लाख रुपये देने की घोषणा की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी राशि से पक्का मकान बना पाना लगभग असंभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कई मकानों को कच्चा बताकर मुआवजे की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। सिर्फ 38 लोगों को कच्चा मकान दिखाकर 5 लाख की राशि दी गई।
करण महारा ने आपदा क्षेत्र की स्थिति को बताया दर्दनाक
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण महारा ने भी आपदा क्षेत्र की स्थिति को दर्दनाक बताते हुए कहा कि लोग अपने परिजनों को खुद ढूंढ रहे थे। उन्होंने पीएम के मुखबा दौरे पर भी सवाल उठाए। महारा ने कहा कि पीएम के आने से पहले सेब के बागान काटकर पार्किंग बनाई गई, लेकिन किसानों को इसका कोई मुआवजा नहीं दिया गया। महारा ने यह भी दावा किया कि उत्तरकाशी के बड़कोट में आई आपदा में 7 लोगों को न मृत घोषित किया गया, न जीवित मानकर राहत दी गई।
राज्यपाल से मुलाकात करेगा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल
महारा ने कहा कि आज भी कई जगहों पर पानी, बिजली और मवेशी अब भी मलबे में दबे पड़े हैं। वहीं लिनचोली और बॉर्डर क्षेत्र में अभी भी अस्थायी बेली ब्रिज काम चला रहे हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं हैं। महारा ने घोषणा की कि कांग्रेस जल्द ही इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात करेगा और विस्तृत जानकारी सौंपेगा।
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