
देहरादून: आईएमए में पासिंग आउट परेड के बाद 306 कैडेट भारतीय सेना बतौर अधिकारी मिल गए हैं। ये अधिकारी अब आधिकारिक रूप से भारती सेना का हिस्सा बन गए हैं। मित्र देशों के 71 कैडेट भी पास आउट होकर अपने-अपने देशों की सेना में शामिल हो गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रिव्यूइंग अफसर के तौर पर परेड की सलामी ली।
उत्तराखंड के युवाओं में देशभक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। हर छह महीने बाद होने वाली भारतीय सैन्य अकादमी की पासिंग आउट परेड में इसकी झलक देखने को मिलती है। प्रदेश की आबादी देश की आबादी का महज 0.84 फीसद है लेकिन पीओपी में पहाड़ का जोश खूब हिलोर मारता है. आइएमए से कुल पासआउट होने वाले 306 भारतीय कैडेटों में राज्य के सहयोग का स्तर 19 कैडेटों के साथ छह प्रतिशत से ऊपर है.
राज्यवार आंकड़ा
उत्तरप्रदेश-56
हरियाणा-39
बिहार-24
राजस्थान-21
उत्तराखंड-19
हिमाचल प्रदेश-18
महाराष्ट्र-19
दिल्ली-16
पंजाब-11
मध्य-प्रदेश-10
केरल-10
तमिलनाडु-09
जम्मू-कश्मीर-06
कर्नाटक-07
पश्चिम बंगाल-06
आंध्र प्रदेश-06
तेलंगाना-05
मणिपुर-04
झारखंड-04
चंडीगढ़-04
गुजरात-04
असम-02
उड़ीसा-01
मिजोरम-01
सिक्किम-01
नेपाल-2
वहीं पीओपी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी पहुंचे। डिप्टी कमांडेंट मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत और कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसके झा ने पहले परेड की सलामी ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कैडेटों को ओवरऑल बेस्ट परफॉर्मेंस व अन्य उत्कृष्ट सम्मान से नवाजा। विनय विलास को स्वार्ड ऑफ ऑनर व स्वर्ण पदक दिया गया। पीकेंद्र सिंह को रजत और ध्रुव मेहला को कांस्य पदक दिया गया। शिवराज सिंह को सिल्वर मेडल (टीजी) मिला। भूटान के कुएंजांग वांगचुक सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट चुने गए। चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ बैनर केरन कंपनी को मिला।
देश की सीमा पर हो या किसी भी राज्य में उत्तराखंड से कई युवा सेना में रहकर देश की रक्षा कर रहे हैं. उत्तराँखंड में हर घर से कोई न कोई देश की रक्षा कर रहा है. वबीं अब सेना में अधिकारी के तौर पर ही उत्तराखंड के जांबाज अव्वल हैं और कइयो ने देश के लिए अपनी जान गंवाई है जिन्हे इतिहास के पन्नों पर लिखा गया औऱ हमेशा याद कियाजाता है।