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पहले दिल्ली फिर बिहार, एक ही साल में BJP के इस पूर्व सांसद की डबल वोटिंग से खड़ा हुआ बखेड़ा-Bihar Election 2025

Bihar Election 2025 बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच एक बड़ा विवाद पैदा हो गया है। यहां पर बीजेपी के पूर्व सांसद ने बिहार चुनाव के समय वोट(Vote) डाला। अब आप कहेंगे कि, इसमे क्या बड़ी बात है?, लेकिन ताज्जुब की बात तो ये है कि बिहार के अलावा उन्होंने इसी साल दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी वोट डाला। यानी कि 10 महीने के अंदर पूर्व सांसद ने दो बारी वोट डाला। ये आरोप और किसी पर नहीं बल्कि बीजेपी के पूर्व राज्यसभा सांसद राकेश कुमार सिन्हा (former bjp mp rakesh sinha) पर लगे है।

Bihar Election 2025: पहले दिल्ली फिर बिहार! एक ही साल में BJP के इस पूर्व सांसद ने 2 जगह डाला वोट

दरअसल राकेश सिन्हा(Rakesh Sinha) ने 6 नवंबर 2025 को बेगूसराय के अपने पैतृक गांव मनसेरपुर (साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र) में वोट डाला। जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी भी दी। हालांकि इसके बाद विपक्षी दलों– राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस ने उन्हें घेर लिया। इसे वोट चोरी का उदाहरण बताते हुए विपक्षी दलों ने इसपर चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमला बोल दिया। इस पूरे मामले के वायरल होने के बाद अब राकेश सिन्हा की इसपर सफाई आई है।

Bihar Election 2025

डबल वोटिंग से खड़ा हुआ बखेड़ा

सोशल मीडिया पर पूर्व सांसद राकेश सिन्हा ने बिहार में अपने पैतृक गांव मनसेरपुर (बेगूसराय) में वोट डालने के बाद पोस्ट किया। हालांकि इसके कुछ ही देर बाद यूजर्स ने उनके पुराने पोस्ट खंगालने शुरू कर दिए। जिसमें उनकी पुरी पोस्ट वायरल हो गई। इस पुरानी पोस्ट में वो इसी साल के शुरूआत में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान द्वारका सीट पर मतदान करते नजर आए।

डबल वोटिंग पर BJP के पूर्व सांसद राकेश सिन्हा की सफाई

सोशल मीडिया एक्स पर राकेश सिन्हा(bjp mp rakesh sinha) ने इस पर सफाई पेश की है। उन्होने कहा कि, “मेरा पुश्तैनी घर बेगूसराय में है । जमीन से उखड़ा आदमी मैं नहीं हूं। वोट देने के लिए पैसे खर्च कर, छुट्टी लेकर अपने गांव आया। संविधान के मूल्यों की बात कौन कर रहा है? आम आदमी पार्टी तो लोकतंत्र पर कलंक है। कलंकित लोग RSS को नैतिकता नहीं सिखाए! राजनीति इतनी हल्की हो सकती है इसका अंदाजा मुझे नहीं था।

संविधान में आस्था रखने वालों पर सवाल करने वाले पर सवाल करने वालों को सौ बार सोच लेना चाहिए। मेरा नाम दिल्ली के मतदाता सूची में था। बिहार की राजनीति में सक्रियता के कारण मैंने अपना नाम गांव मनसेरपुर (बेगूसराय) करा लिया। क्या इस आरोप के लिए मैं मानहानि करूं?”

क्या कहता है जनप्रतिनिधित्व कानून?

कानून को देखा जाए तो जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 वोटर लिस्ट के संबंध में एक दम साफ नियम बताता है। कानून के अनुच्छेद-17 के तहत ये साफ तौर पर कहा गया है कि कोई भी नागरिक एक साथ दो राज्यों की मतदाता लिस्ट में पंजीकृत नहीं रह सकता। ना ही वो दो अलग-अलग राज्यों में वोट डाल सकता है।

ऐसे में ये साफ है कि अगर दोनों जगह राकेश कुमार सिन्हा का जानबूझकर नाम लिस्ट में डाला गया है तो ये कानून का उल्लंघन माना जाएगा। इसके तहत व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल मीडिया से जुड़ी युवा पत्रकार उमा कोठारी इस समय खबर उत्तराखंड.कॉम के साथ काम कर रही हैं। उमा अलग-अलग बीट पर खबरें लिखती हैं, जिनमें देश-दुनिया की राजनीतिक गतिविधियों की अहम खबरें, मनोरंजन, खेल और ट्रेंड से जुड़ी अपडेट शामिल हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए वे ट्रेंड और तथ्य दोनों का संतुलन बनाए रखती हैं, ताकि पाठकों तक सही और ज़रूरी जानकारी पहुंचे।
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