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उत्तराखंड से बड़ी खबर : जल्द होगा मंत्रिमंडल विस्तार, इन विधायकों के पक्ष में है समीकरण!

 

bansi dhar bhagatदेहरादून : उत्तराखंड में सरकार बनने के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं चल रही हैं। मंत्री बनने की दौड़ में शामिल विधायकों का इंतजार इतना खिंचता चला गया कि सरकार का कार्याकाल अब करीब डेढ़ साल ही बचा है। हालांकि अब भाजपा कोर ग्रुप की बैठक के बाद विधायकों का इंतजार खत्म होता नजर आ रहा है। बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला CM त्रिवेंद्र रावत पर छोड़ा गया है। उन्हीं को तय करना है कि किसे मंत्री बनाया जाएगा ? इस फैसले के बाद अब विधायक भी मंत्री बनने की लाॅबिंग तेज करने लगे हैं। देखना यह होगा कि सीएम त्रिवेंद्र रावत किस पर भरोसा करते हैं।

3 मंत्री पद 

सरकार गठन के वक्त से त्रिवेंद्र रावत कैबिनेट में 6 कैबिनेट मंत्री और 2 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं। उत्तराखंड की कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत 12 सदस्य शामिल किए जा सकते हैं। दो मंत्री पद पहले से ही खाली चल रहे थे। जबकि एक पद कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के दिवंगत होने के बाद खाली हुआ था। इस तरह मंत्रिमंडल में 3 मंत्री पद खाली चल रहे हैं। इन पर दवा करने वाले विधायकों लिस्ट बहुत लंबी है। ऐसे में सीएम और पार्टी के लिए यह तय करना थोड़ा कठिन हो सकता है कि मंत्री किसको बनाया जाए।

जीत का समीकरण

मंत्री बनाने के लिए सीएम त्रिवेंद्र रावत और पार्टी को क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के अलावा कुछ अन्य समीकरण भी देखने होंगे। इन समीकरणों में सबसे अहम समीकरण चुनावी समर में जीत का समीकरण है। फिर से सत्ता में आने के लिए CM त्रिवेंद्र रावत और BJP अभी से चुनावी मोड़ में नजर आ रहे हैं। मंत्री मंडल में उन्हीं विधायकों को शामिल किया जाएगा, जिनसे पार्टी और सरकार को यह लगेगा कि चुनावी समर में वो पार्टी के कितने काम आ सकते हैं। अपनी सीटों के अलावा उनका प्रभाव आसपास की कितनी सीटों पर हो सकता है।

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार का प्रमोशन 

अनुमान और चर्चाएं इस बात की भी चल रही हैं कि कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के देहांत के बाद उनकी जगह पर कुमाऊं मंडल से ही किसी को मंत्री बनाया जाएगा। दूसरा यह कि क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए एक और मंत्री पद कुमाऊं में दिया जा सकता है। हालांकि यह अब CM पर ही निर्भर है कि वो समीकरणों को किस तरह से साधते हैं। इसमें एक और समीकरण यह है कि दो राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार में से एक मंत्री का प्रमोशन हो सकता है। ऐसे में एक राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार का पद भी खाली हो जाएगा। उनकी जगह भी नया राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया जाएगा। इस तरह कुलमिलाकर देखा जाए तो 4 विधायकों को कैबिनेट में शामिल होने का मौका मिल सकता है।

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