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बड़ा सवाल : क्या भगत दा की गुगली से क्लीन बोल्ड हुए शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस!

breaking uttrakhand newsदेहरादून: भगत दा यानि भगत सिंह कोश्यारी। सियासत के मंझे खिलाड़ी। राजनीति का सालों लंबा अनुभव। हल्का-फुल्का अंदाज और हंसता हुआ चेहरा। भगत दा की चर्चा इसलिए कि महाराष्ट्र में जिस तरह से सियासी घटनाक्रम बदला। उसके पीछे कहीं ना कहीं राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का अहम रोल है। कुल मिलाकर सरकार उन्हीं के निमंत्रण पर बननी या बिगड़नी थी, इसलिए उनका किरदार ज्यादा गंभीर था। अब सवाल भी उन्हीं की ओर उछाले जा रहे हैं। गंभीर आरोप भी लग रहे हैं।

भगत दा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से लेकर सांसद और पार्टी में अहम पदों पर भी रहे। भगत दा आरएसएस में पड़े पदों पर बैठे लोगों के करीबी रहे। इसलिए उनका दखल हमेशा से केंद्र की राजनीति में भी बना रहा। महाराष्ट्र में हालिया घटनाक्रम के बीच भगव सिंह कोश्यारी पहले साइलेंट रहे। लेकिन, जैसे ही गेम चेचिंग मूवमेंट आया। भगत दा ने अपना काम किया।

अब भगत दा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने केंद्र के इशारे पर सारे कायदों को दरकिनार कर सरकार बनाने के लिए भाजपा को बुलाया, जबकि नियम और कानून के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। यह भी आरोप है कि केवल कुछ घंटों में राज्यपाल ने भाजपा को गुपचुप ढंग से सरकार बनाने का निमंत्रण दिया और कानों-कान किसी को जानकारी भी नहीं लगने दी।

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