
देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन आखिरी वक्त में कैग की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में कैग ने जहां सरकार के वित्तीय प्रबंधन की पोल खोली, वहीं समाज कल्याण विभाग में करोड़ों के पेंशन घोटाले का खुलासा भी किया। समाय कल्याण विभाग का हाल यह है कि विभाग ने एक पेंशनर की उम्र 901 साल दर्ज की है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि समाज कल्याण विभाग किस कदर लापरवाह है।
कैग ने विभाग के राष्ट्रीय सूचना केंद्र के सहयोग से बनाए गए ईएसपीएएन साफ्टवेयर में डेटाबेस में गंभीर खामियां उजागर की। कैग ने पाया कि उम्र के कालम में 901 साल तक की एक व्यक्ति की उम्र दिखाई गई है। इतना नहीं, 4000 रुपये से अधिक की राशि के इनपुट को रोकने के लिए इनपुट कंट्रोल की कमी थी।
मोबाइल नंबर बीपीएल डेटाबेस से लिंक, प्रणाली में एक हजार तक प्रति व्यक्ति पेंशन सीमित करने का कोई प्रावधान नहीं था। पुत्र की मासिक आय व पुत्र व्यवसाय कालम में शून्य है, जबकि यह पेंशन की पात्रता का अहम मानक है। इससे सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी तरह समाज कल्याण विभाग ने नियमों की अनदेखी कर सैकड़ों अपात्र लोगों को पेंशन बांट दी।