ऐसे कैसे बनेगा उत्तराखंड सिरमौर? दस किमी का कंधों पर सफर, फिर मिली मौत

gopeshwar chamoli nandan singh died
Photo – Amar Ujala

आने वाला दशक उत्तराखंड के होने की बात भले ही कही जा रही हो लेकिन इस राज्य का तल्ख सच यही है कि आज भी पर्वतीय इलाकों में स्वास्थ सुविधा के लिए हमारे पास कोई ऐसा सटीक मॉडल नहीं है जो समय पर उपचार उपलब्ध करा पाए और लोगों की जिंदगी बचा पाए।

ऐसा हम इसलिए कह रहें हैं क्योंकि गोपेश्वर में जो वाक्या सामने आया है वो पूरे हेल्थ सिस्टम को एक बार फिर झकझोरने के लिए काफी है। यहां एक बुजुर्ग को डंडी कंडी के सहारे दस किलोमीटर लाया गया। अस्पताल पहुंचते पहुंचते देर हो गई सो अस्पताल में भी डाक्टर बुजुर्ग की जान नहीं बचा पाए।

अमर उजाला में प्रकाशित एक खबर के अनुसार पोखरी विकासखंड के चौंडी गांव के 80 साल के बुजुर्ग नंदन सिंह की तबियत 7 अगस्त को बिगड़ी। उन्हें बल्ड प्रेशर की समस्या थी। उनका इलाज पिछले कुछ महीनो से पोखरी के स्वास्थ केंद्र से ही चल रहा था। 7 को जब तबियत बिगड़ी तो उन्हे डाक्टर के पास ले जाने की जरूरत महसूस हुई।

एक महीने से बंद मार्ग 

भारी बारिश और भूस्खलन के चलते उनके गांव से ऋषिकेश की ओर जाने वाला रडामांता – रौता और पोखरी हरिशंकर मोटर मार्ग पिछले एक महीने से बंद है। लिहाजा नंदन सिंह को उनके परिजन सोमवार यानी 8 अगस्त को डंडी कंडी पर लेकर दस किलोमीटर पैदल लेकर चले। किसी तरह उन्हे सड़क पर लाया गया। इसके बाद उन्हे ऋषिकेश में डाक्टरों के पास दिखाने पहुंचे। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। नंदन सिंह को नहीं बचाया जा सका और उनकी मौत हो गई।

नंदन सिंह की मौत राज्य में न सिर्फ हेल्थ सिस्टम के लिए सवाल खड़े करने वाली है बल्कि आपदा प्रबंधन में लगी इकाइयों के लिए भी सवाल है। आखिर कैसे एक मार्ग एक महीने तक बाधित रहा और अधिकारियों को खबर तक नहीं लगी? सड़कों को सुचारू रखने की जिम्मेदारी किसकी है?

रितिक की भी हुई थी मौत

ऐसा ही एक वाक्या अभी चंपावत में भी सामने आया था जब 11 साल के छात्र रितिक को ले जारी एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिल पाया। मार्ग अवरुद्ध होने से उसकी एंबुलेंस को लौटना पड़ गया और उसकी मौत हो गई।

फिर हेल्थ सिस्टम के हालात ऐसे क्यों हैं कि तमाम कोशिशों और प्रयासों के बावजूद आम नागरिकों तक स्वास्थ सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही है। एअर एंबुलेंस जैसी सेवाएं कहां गुम हो गईं। जिले के प्रभारी मंत्रियों से क्यों नहीं पूछा जाता? ऐसे तमाम सवाल हैं जो नंदन सिंह की मौत से उठ रहें हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस राज्य के जिम्मेदार लोग ऐसी अव्यवस्थाओं को वास्तविकता में दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे।

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