उत्तराखंड में बनेगा उच्च स्तरीय संस्कृत आयोग, भारतीय ज्ञान परंपरा को मिलेगा नया मंच

16 जुलाई को उत्तराखंड में संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन, प्रचार-प्रसार और भारतीय ज्ञान परम्परा के समग्र विकास के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड संस्कृत आयोग के गठन के संबंध में सचिवालय में एक उच्च स्तरीय संवाद और परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोग की संरचना, उद्देश्य, कार्यक्षेत्र और भावी कार्ययोजना पर देश के प्रमुख संस्कृत विद्वानों, शिक्षाविदों, कुलपतियों एवं नीति-विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत सुझाव प्रस्तुत किए गए।
उत्तराखंड में उच्च स्तरीय संस्कृत आयोग के गठन पर राष्ट्रीय स्तर का मंथन
बैठक की अध्यक्षता कर रहे संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने उत्तराखंड में संस्कृत भाषा और संस्कृत शिक्षा की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, उत्तराखंड संस्कृत संस्थान, संस्कृत शिक्षा निदेशालय तथा संस्कृत शिक्षा परिषद् द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी दी।
संस्कृत भाषा को उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। इस दिशा में अनेक अभिनव पहल की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 7 जनवरी, 2010 को संस्कृत भाषा को उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा का संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।
जो राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय रहा है। उन्होंने आगे बताया कि उत्तराखण्ड राज्य के सभी 13 जनपदों में संस्कृत ग्रामों के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि, संस्कृत कुटुम्ब सम्मेलन तथा संस्कृत विदुषी सम्मेलन जैसे सफल कार्यक्रम राज्य में संस्कृत संवर्धन की दृष्टि से अपने-आप में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
केवल भाषा नहीं, भारतीय ज्ञान परंपरा पर रहेगा फोकस
बैठक में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि 1 दिसम्बर, 2025 को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्च स्तरीय उत्तराखंड संस्कृत आयोग के गठन की आवश्यकता पर बल दिया था। इसी क्रम में आयोग की रूपरेखा तैयार करने के लिए देशभर के संस्कृत विश्वविद्यालयों, शिक्षाविदों, विद्वानों एवं विभिन्न संस्थाओं से सुझाव प्राप्त किए गए हैं।
बैठक में ये सुझाव प्रमुखता से सामने आया कि प्रस्तावित आयोग केवल संस्कृत भाषा के संरक्षण तक सीमित न रहकर भारतीय ज्ञान परम्परा, वैदिक अध्ययन, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगारोन्मुखी संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करे।
संस्कृत विजय यात्रा आयोजन का सुझाव
बैठक में संस्कृत के व्यापक जनजागरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘संस्कृत विजय यात्रा’ आयोजित करने का सुझाव दिया गया। साथ ही, देशभर के संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, संस्कृत अकादमियों के सचिवों एवं प्रमुख विद्वानों के सहयोग से संस्कृत के प्रचार-प्रसार हेतु एक समन्वित राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया गया।
विश्वविद्यालयों में संस्कृत को बढ़ावा देने की सिफारिश
उत्तराखंड के सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत और हिन्दू अध्ययन विभाग अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाने, संस्कृत भाषा में अधिकाधिक राजकीय कार्य किए जाने तथा राज्य के समस्त मंत्रालयों एवं विभागों में संस्कृत अनुवादकों की नियुक्ति किए जाने का भी सुझाव दिया गया। जिससे अधिक से अधिक कार्य संस्कृत भाषा में संपादित किए जा सकें।
साथ ही, विशेषज्ञों ने वैदिक ऋषियों एवं महान आचार्यों के नाम पर अध्ययन पीठों की स्थापना, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संवादात्मक संस्कृत शिक्षण केन्द्र विकसित करने तथा संस्कृत के साथ पाली एवं प्राकृत भाषाओं के अध्ययन, अध्यापन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर बल दिया।
संस्कृत भाषा में फिल्मों को मिलेगा प्रोत्साहन
उत्तराखंड शासन द्वारा संस्कृत भाषा में फिल्म, वृत्तचित्र एवं डिजिटल सामग्री के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तथा वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त संस्कृत आचार्यों के ज्ञान एवं अनुभव का उपयोग ‘संस्कृत चूड़ामणि योजना’ के माध्यम से शास्त्र-अध्ययन, प्रशिक्षण एवं शोध गतिविधियों में करने का भी सुझाव बैठक में सम्मिलित विद्वानों ने दिया।
बैठक में उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित संस्कृत विद्यालयों और पाठशालाओं के आधारभूत ढांचे, शैक्षिक संसाधनों एवं शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि आयोग के गठन और उसके उद्देश्यों के संबंध में एक प्रतिनिधिमण्डल शीघ्र ही माननीय राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री तथा भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश से भेंट कर आयोग की रूपरेखा एवं भावी कार्ययोजना पर विस्तृत विचार-विमर्श करेगा