‘जो बोले सो निहाल’ के जयकारों के साथ खुले हेमकुंड साहिब के कपाट, तीन हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

सिख धर्म की आस्था के प्रमुख केंद्र और पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब के कपाट आज विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं के दर्शना के लिए खोल दिए गए। इसी के साथ hemkund sahib की वार्षिक यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। कपाट खुलने के अवसर पर करीब तीन हजार से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे।
श्रद्धालुओं के लिए हेमकुंड साहिब के कपाट
हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 आज आध्यात्मिक उत्साह और गहरी श्रद्धा के साथ औपचारिक रूप से शुरू हुई। गुरु ग्रंथ साहिब को पवित्र स्थल तक ले जाने वाली शोभायात्रा बड़ी गरिमा के साथ संपन्न हुई। हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने की प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को गोविन्दघाट गुरुद्वारे से ‘पंच प्यारों’ की अगुवाई में श्रद्धालुओं का पहला जत्था भारी उत्साह, बैंड-बाजों की धुन, पवित्र निशान साहिब और कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुआ था।

सुबह 9 बजे बेस कैंप से शुरू हुई यह शुभ यात्रा पंज प्यारों के नेतृत्व में हुई। मुख्य ग्रंथी ने पूर्ण मर्यादा के साथ पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को सिर पर धारण किया। भक्तों ने कीर्तन का गान करते हुए साथ दिया। भारतीय सेना के बैंड ने भक्ति पूर्ण और मार्शल धुनें बजाईं। भारतीय सेना के जवान, जिन्होंने यात्रा मार्ग से बर्फ हटाने का कठिन कार्य किया था, शोभायात्रा प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा में सक्रिय रूप से शामिल रहे।
ब्रिगेडियर बत्रा और कर्नल विरेंद्र ओला को किया सम्मनित
कपाट खुलने के पहले दिन ब्रिगेडियर बत्रा और कर्नल विरेंद्र ओला को सेना द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्य के लिए सीरोपा प्रदान किया गया। इसके अलावा भीड़ प्रबंधन की बेहतरीन व्यवस्था के लिए इंस्पेक्टर चित्रगुप्त और सब इंस्पेक्टर अमनदीप को भी सीरोपा से सम्मानित किया गया।
बर्फ से ढके पर्वत शिखरों से घिरा हुआ है हेमकुंड साहिब
बता दें हर वर्ष साल -जून से शुरू होकर अक्टूबर तक चलने वाली इस पावन यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शीश नवाने पहुंचते हैं। बता दें हेमकुंड साहिब गढ़वाल हिमालय में लगभग 4,632 मीटर (15,200 फीट) की ऊंचाई पर स्थित एक अत्यंत पवित्र सिख तीर्थस्थल है, जो बर्फ से ढके पर्वत शिखरों और स्वच्छ झील से घिरा हुआ है।