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Terrorist Attack : आर्मी में ही जाना चाहते थे शहीद कैप्टन दीपक सिंह, पिता को बेटे की शहादत पर है गर्व

जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में उत्तराखंड का लाल शहीद हो गया। आर्मी के ऑपरेशन के दौरान आर्मी के 48 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात कैप्टन दीपक सिंह शहीद हो गए। शहीद का पार्थिव शरीर आज उनके आवास पर लाया जाएगा। शहादत की खबर मिलने के बाद से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

शहीद का पार्थिव शरीर आज लाया जाएगा घर

जम्मू कश्मीर के डोडा में हुए आतंकी मुठभेड़ में उत्तराखंड के लाल दीपक शहीद गहो गए। कैप्टन शहीद दीपक सिंह मूल रूप से अल्मोड़ा के रानीखेत के रहने वाले हैं। उनका परिवार वर्तमान में देहरादून के कुंआवाला में रहता है। आज उनका पार्थिव शरीर उनके आवास पर लाया जाएगा। अब से कुछ घंटे बाद शहीद कैप्टन दीपक सिंह का पार्थिव शरीर उनके आवास पर पहुंचेगा। शहीद के आवास पर श्रद्धांजलि देने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

आर्मी में ही जाना चाहते थे शहीद कैप्टन दीपक सिंह

बता दें कि 25 वर्षीय शहीद कैप्टन दीपक सिंह 48 राष्ट्रीय राइफल्स में सिग्नल अधिकारी के पद पर तैनात थे। साल 2020 में दीपक सेना में भर्ती हुए थे। शहीद कैप्टन दीपक सिंह के पिता महेश सिंह उत्तराखंड पुलिस में सेवा दे चुके हैं। शहीद दीपक के पिता ने बताया कि शहीद कैप्टन दीपक सिंह की इच्छा आर्मी में ही जाने की थी। बेटे के शहीद होने के बाद पिता के आंखों में आंसू नहीं है बल्कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है।

दो बहनों के इकलौते भाई थे शहीद दीपक सिंह

पिता को एक बात का अफसोस है कि उनका बेटा पिता से पहले चला गया। पिता का कहना है कि बेटे ने कई मेडल जीते हैं और दीवार में जगह नहीं होने के कारण वो अलमारी में रखे हुए हैं। बता दें कि शहीद दीपक दो बहनों के इकलौते भाई थे। दोनो बहनों की शादी हो चुकी है। छोटी बहन की शादी मई 2024 में हुई थी।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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