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क्या आप जानते हैं राक्षस ताल के बारे में ?, क्यों कैलाश की इस झील का पानी छूना भी है मना

कैलाश प्राकृतिक खूबसूरती से भरी जगह जहां जाकर एक अलग ही तरह की शांति का अनुभव होता है। एक अलग प्रकार की खुशी मिलती है। लेकिन ऐसी जगह पर एक ऐसा स्थान है जो नकारात्मक ऊर्जा का अहसास कराता है। हम बात कर रहे हैं कैलाश की एक शापित झील की जिसका नाम राक्षस ताल है। ये स्थान देखने में जितना खूबसूरत है उतना ही अपने आप में रहस्य समेटे हुए है। झील सुनकर आप इसमें नहाने की सोच रहे होंगे लेकिन यहां पर नहाना मना है।

कैसा है कैलाश कि शापित राक्षस ताल ?

राक्षस ताल कैलाश मानसरोवर के पश्चिम में स्थित है, जिसकी गहराई 150 फीट है। राक्षस ताल को कैलाश मानसरोवर से गंगा-चू नाम की छोटी नदी जोड़ती है। मानसरोवर के इतने पास होने के बावजूद इस राक्षस ताल (Rakshas taal) में जीवन का एक छोटा सा निशान तक नहीं दिखता। ऐसा लगता है मानो इस झील में आकर सब खत्म हो जाता हो।

जहां मानसरोवर झील मीठे पीनी की झील है तो वहीं राक्षस ताल का पानी खारा है। कैलाश पर्वत के ठीक नीचे बसी इन दोनों झीलों के पानी में जमीन आसमान का फर्क होना अपने आप में एक बहुत बड़ा रहस्य है। राक्षस ताल के उत्तर-पश्चिमी सिरे से सतलज नदी निकलती है। जहां एक तरफ मानसरोवर को सूरज की छवि माना जाता है वहीं राक्षस ताल को चंद्र की छवि कहा जाता है।

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राक्षस ताल

क्या है राक्षस ताल (Rakshas Taal) की कहानी ?

पौराणिक कहानियों के अनुसार राक्षस झील का निर्माण रामायण काल में रावण ने किया था। माना जाता है रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां घोर तप किया था। जबकि तिब्बती किंवदंती के मुताबिक एक बार एक यात्री ऊंचाई वाले पहाड़ों से ट्रैकिंग करता हुआ ला अंगकुओ झील यानी राक्षस ताल तक पहुंचा। यहां पहुंचने पर उसे चलते-चलते बहुत प्यास लग गई। राक्षस ताल का पानी पीना उसके लिए सबसे आसान विकल्प था। कहा जाता है जैसे ही उस यात्री ने राक्षस झील का पानी पिया तो उस दुष्ट झील की बुरी आत्मा यात्री की आत्मा पर हावी हो गई और कुछ समय बाद उस यात्री की मृत्यु हो गई।

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Rakshas taal

इस झील का पानी छूना भी है मना

जैसा कि हम जानते ही हैं कि पॉजिटिविटी से ज्यादा हर एक शख्स को नैगेटीविटी अट्रैक्ट करती है। वैसे ही राक्षस ताल भी कई लोगों को अट्रैक्ट करता है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा में आने वाला हर एक यात्री राक्षस ताल के रहस्य को जानने की चाह रखता है। इसके साथ ही इस ताल के प्रति एक अलग तरह का अट्रैकशन महसूस करता है। मानसरोवर में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं लेकिन राक्षस ताल में डुबकी लगाने से नैगेटिविटी अट्रैक्ट होती है। यहां लोगों को ज्यादा देर रुकने से मना किया जाता है।

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राक्षस ताल

डुबकी ना लगाने का ये बताया जाता है वैज्ञानिक कारण

राक्षस ताल में डुबकी नहीं लगाने के पीछे का एक वैज्ञानिक कारण भी बताया जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पानी में कुछ खास तरह की प्राकृतिक गैसें मिली हैं। जिससे यहां का पानी थोड़ा जहरीला हो गया है। माना जाता है यहां डुबकी लगाने से आप बेहोश हो सकते हैं। भले ही इस पानी में नहाने से या इसे छूने से आप मरे नहीं लेकिन आप को कुछ विपरीत प्रभाव जरूर देखने को मिलेंगे।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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