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जातीय जनगणना को लेकर उत्तराखंड में क्या है सियासी दलों की राय, जानें खास रिपोर्ट में

बिहार में जातीय जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद पूरे देश में इन दिनों जातीय जनगणना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। उत्तराखंड में सियासी दल जातीय जनगणना को लेकर क्या कुछ राय रखते हैं और उत्तराखंड में क्या कुछ आंकड़े जातीय समीकरण को लेकर चुनाव के समय अहम फैक्टर के रूप में देखे जाते हैं जानें हमारी इस खास रिपोर्ट में।

बिहार में जातीय जनगणना के बाद चर्चाओं के बाजार गर्म

बिहार में जातीय जनगणना के आंकड़े सामने आने के बाद पूरे देश में चर्चाओं के बाजार गर्म हैं। अब इस बात की चर्चाएं जोरों पर हैं कि क्या वास्तव में जाति के आधार पर आंकड़े जारी होने चाहिए या नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सीधे तौर से जातीय जनगणना के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं पूरी बीजेपी जातीय जनगणना के विरोध में खड़ी नजर आ रही है।

उत्तराखंड में जाति और क्षेत्रीय समीकरण काफी अहम

उत्तराखंड की बात करें तो उत्तराखंड में भले ही जातीय जनगणना को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है। लेकिन चुनाव के समय जाति और क्षेत्रीय समीकरण काफी अहम माने जाते हैं। यही नहीं सभी राजनीतिक दल सामंजस्य बिठाने के लिए जातीय और क्षेत्रीय समीकरण के तहत ही अहम पदों पर नेताओं को जिम्मेदारी भी देते हैं।

उदाहरण के तौर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वर्तमान में कुमाऊं से आते हैं जो की ठाकुर है इसलिए भाजपा के द्वारा गढ़वाल से आने वाले ब्राह्मण चेहरे महेंद्र भट्ट को प्रदेश संगठन की कमान सौंपी गई है।

वहीं जब कुमाऊं से हरीश रावत प्रदेश में मुख्यमंत्री की कमान संभाले थे तो कांग्रेस के द्वारा गढ़वाल से किशोर उपाध्याय जो कि ब्राह्मण चेहरा हैं उनका कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। यही नहीं कैबिनेट कैबिनेट की बात हो या फिर भाजपा कांग्रेस में संगठन की कार्यकारिणी का विस्तार हो दोनों दल क्षेत्रीय और जातीय समीकरण के तहत ही नेताओं को जिम्मेदारी देते आए।

जातीय जनगणना पर लगना चाहिए अंकुश – बीजेपी

उत्तराखंड में जब जातीय जनगणना की चर्चाएं हो रही है तो भाजपा का कहना है कि ये संदेश ठीक नहीं है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और राजपुर से विधायक खजान दास का कहना है कि जातीय जनगणना पर अंकुश लगना चाहिए। कांग्रेस की राजनीति हमेशा जाति के आधार पर ही रही है।

भाजपा सबका साथ सबका विकास में विश्वास रखती है। राजनीति में जातीय समीकरण के आधार पर जिम्मेदारियां मिलने को लेकर खजानदास का कहना है कि जातीय समीकरण के तहत संतुलन बनाना अच्छी बात है, लेकिन चिन्हिकरण करना ठीक नहीं है।

जातीय जनगणना न्याय उचित मांग है – कांग्रेस

जातीय जनगणना को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण महारा का कहना है कि जातीय जनगणना न्याय उचित मांग है। कांग्रेस पार्टी तो पूरे देश में जाति जनगणना के पक्ष में है। जातीय जनगणना होती है तो इसका फायदा उन जातियों को भी मिलेगा जो काफी पिछड़ी हुई हैं।

ये है प्रदेश के जातीय समीकरण

उत्तराखंड में जातीय समीकरणों की बात करें तो वोटरों के लिहाज से सीएसडीएस-लोकनीति के द्वारा एक सर्वे कुछ समय पहले किया गया था। जिसके मुताबिक प्रदेश में करीब 12 फीसद ब्राह्मण, 33 फीसद ठाकुर, सात फीसद अन्य सवर्ण, सात फीसद अन्य पिछड़ा वर्ग, 19 फीसद दलित, 14 फीसद मुसलमान व आठ फीसद अन्य वोटर हैं।

जातीय जनगणना को लेकर सियासत लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखी जा रही है। ऐसे में देखना यही होगा कि आखिरकार जातीय जनगणना को लेकर जो सियासी दावा पेंच अपनाएं जा रहे हैं, उसे किस राजनीतिक दल को ज्यादा फायदा होता है।

इनपुट – मनीष डंगवाल

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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