
देहरादून : उत्तराखंड में एक ऐसी कोरोना वारियर भी है जो खुद अपने हाथों से खाना बनाकर जरुरतमंदों और कोरोना योद्धाओं को बांट रही है। इस कोरोना वारियर को हर को सलाम कर रहा है जो कि एक अनूठी मिसाल कायम कर रही है। शिल्पा के सपनों को कोई दबा नहीं सका। लंदन की बड़ी यूनिर्सिटी में पढ़ाई करने का सपना सबका होता है लेकिन शिल्पा को देवभूमि लौटकर समाज सेवा करनी थी औऱ अपनी मेहनत के बल पर मुकाम पाना था जो की आज शिल्पा ने पाया।
अपने हाथों से खाना बनाकर बांट रही शिल्पा
हम बात कर रहे हैं देहरादून की शिल्पा की जो की पेशे से एक उद्यमी है। जो की कोरोना से जंग लड़ रही हैं और जरुरत मंदों को अपने हाथ से खाना बनाकर औऱ पैक कर बांट रही है। 3 साल की छोटी बेटी है, सास-ससुर और पति है, इन सबकी जिम्मेदारी भी हैं। वो चाहती तो घर मे ही रहकर अपने घर की जिम्मेदारी निभा सकती थी। लेकिन इन सबसे एक और रास्ता चुना, जो कठिनाई वाला था। उसने कोरोना की इस लड़ाई में अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ करने का निर्णय लिया। उसके इस निर्णय में उसके पूरे परिवार ने सकारात्मक सहयोग दिया और उत्साह बढ़ाया।
कोरोना वारियर्स शिल्पा की अनूठी मुहिम, पिज़्ज़ा इटालिया नाम का है स्टोर
आपको बता दें कि शिल्पा भट्ट बहुगुणा पेशे से उद्यमी है। पिज़्ज़ा इटालिया के नाम से देहरादून शहर में स्टोर है। लेकिन लॉक डाउन के कारण स्टोर बं है। इस बीच शिल्पा चुप नहीं बैठीं उन्होंने जरुरतमंदों का पेट भरने की मुहिम शुरु की। शिल्पा का कहना है कि सफ़र अकेले शुरू किया था, आज उस सफ़र में और लोग जुड़ गए। बता दें कि शिल्पा का जज्बा देख कई लोग मदद के लिए आगे आए हैं।
शाम को पुलिस के जवानों के लिए बनाते है चाय और नाश्ता
शिल्पा ने जानकारी दी कि देहरादून के रॉयल एन्फ़ील्ड बाइकर ग्रूप ने भी उसकी इस मुहिम में राशन देकर मदद की ताकि भूखों का पेट भरा जा सके। शिल्पा और शिल्पा के साथ 20 दिन से जरूरतमंद लोगों को भोजन करवा रहे हैं, दिन में 200 से 300 लोगों का खाना बनता हैं और शाम को पुलिस के जवानो के लिए चाय और नाश्ता बनाते हैं। तस्वीरों से नाश्ते की झलक दिख ही रहीं होगी । बस अब यही दुआ हैं की ये करवा जब तक ये समस्या हैं तब तक बिना किसी रुकावट के चलता रहे । उन सभी को दिल से शुक्रिया जिन्होंने मदद के लिए हाथ बढ़ाया । आज 20 दिन बाद ये नतीजा आया की मैं अब इस मुहिम में अकेले नहीं रहीं मेरे साथ और हाथ जुड़ गए है।
शिल्पा के संघर्ष की कहानी
शिल्पा अपने संघर्ष की कहानी बताते हुए कहती है कि मेरे माता-पिता चाहते थे कि वो विदेश से पढ़ाई करे और परिजनों के कहने पर चली भी गई. वहां एडमिशन भी हो गया था लेकिन वहां मन नहीं लगा और वो अपनी देवभूमि लौट आई। शिल्पा का परिवार लंदन में ही रहता था। शिल्पा ने दिल्ली से पढाई पूरी की। पिता अपनी लाडली बेटी की मन की बात समझ गए औऱ बेटी को दिल्ली भेज दिया। शिल्पा ने दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। कैरियर की शुरूआत एक निजी चैनल में बतौर संवाददाता शुरू की। मगर टीवी की चकाचौंध से जल्दी मन भर गया। फिर दो साल पहले खुद का रोजगार शुरू करने का फैसला किया। जहां पिता शिल्पा के साथ खड़े थे। शिल्पा ने Pizza Italia नाम के स्टोर की शुरुआत की औऱ तीन साल बाद कामयाबी हासिल की। आज शिल्पा के 7 रेस्टोरेंट हैं जिसमे 04 पिज़्ज़ा इटालिया, 2 अंग्रेजी बीट और 01 इडली बार है। इनमे कुल 88 कर्मचारी काम कर रहे हैं।
पुलिस जवानों ने की सराहना
शिल्पा रोज शाम को चाय और नाश्ता तैयार करती है और देहरादून शहर में जगह चौराहे पर ड्यूटी दे रहे पुलिस जवानों को देती है। खास बात ये होती है कि हर रोज कुछ नया होता है नाश्ते में, जिसमे पौष्टिकता का पूरा ध्यान रखा जाता है। पुलिस जवानों भी शिल्पा के इस जज़्बे की सराहना करते है।