
देहरादून : कर्तव्य को निभाने के लिए उत्तराखंड की बेटियों कई बलिदानियां दी है। वर्दी के फर्ज के आगे उन्होंने कुछ नहीं देखा और ड्यूटी पर डटीं रहीं। बात करें कोरोना जैसी महामारी और ऐसे हालातों की उत्तराखंड की बेटियां ड्यूटी से टस से मस नहीं हुईं। घर बार त्याग कर सिर्फ वर्दी का फर्ज निभाया। जी हां आज हम बात कर रहे हैं बागेश्वर की पुलिस उपाधीक्षक संगीता और रुद्रप्रयाग की महिला कांस्टेबल कविता की, जिन्होंने अपनी शादी स्थगित कर ड्यूटी पर डटीं रहीं।
बेटियों के जज्बे को सलाम
आज पूरा विभाग और राज्य की जनता इन बेटियों के जज्बे को सलाम कर रही हैं। उत्तराखंड की इन बेटियों ने साबित कर दिया कि अगर उनके कंधों पर भी जिम्मेदारी हो तो वो उसे पूरा करेंगे चाहे फिर कीमत कोई चुकानी पड़े।
सीओ और सिपाही ने शादी की स्थगित
बता दें कि देश में कोरोना संकट के बीच अपने कर्तव्य व फर्ज को महत्वपूर्ण मानते हुए उत्तराखंड पुलिस की दो महिला जवानों ने एक मिसाल पेश की है। जनपद बागेश्वर की पुलिस उपाधीक्षक संगीता और रुद्रप्रयाग की महिला कांस्टेबल कविता ने अपनी शादी स्थगित कर ड्यूटी ज्वाइन की। उनका कहना है कि इस समय स्वयं के बजाय उनकी जिम्मेदारी आम नागरिकों के लिए अधिक है। लोगों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें जागरूक करना है, जिससे किसी भी विषम परिस्थिति से आसानी से निपटा जा सके। हम भी उत्तराखंड की महिला पुलिसकर्मियों समेत पूरे विभाग को सैल्यूट करते हैं जो की दिन रात कोरोना से लोगों को बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।
14 अप्रैल को आनी थी बारात
आपको बता दें कि कपकोट की पुलिस उपाधीक्षक डीएसपी संगीता 14 अप्रैल को दुल्हन बनने वाली थी. 14 अप्रैल को उनकी बारात आने वाली थी लेकिन लॉकडाउन में पुलिस की सतर्कता और ड्यूटी के चलते उन्होंने ड्यूटी को प्राथमिकता दी। बता दें कि डीएसपी संगीता मूल रूप से बेरीनाग की रहने वाली हैं और उनका परिवार हल्द्वानी में रहता है। उनका विवाह मूल रूप से टनकपुर निवासी हल्द्वानी वाणिज्य कर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत दीपक कुमार के साथ होना है लेकिन डीएसपी संगीता ने राज्य की जनता और वर्दी को फर्ज को पहले प्राथमिकता दी। राज्य की जनता को इस खतरनाक वायरस से बचाने की ठानी और शादी रद्द कर दी।