
नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार भले ही कितने ही दावे करे, लेकिन देश की आर्थिक स्थिति लगातार गिरती जा रही है और मोदी सरकार लगातार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह फेल साबित हो रही है। वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है। जुलाई-सितंबर तिमाही में विकास दर 4.5 फीसदी रही। सुस्ती के चलते पहली तिमाही में विकास दर पांच फीसदी रही थी। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इन आंकड़ों को जारी किया था।
विशेषज्ञों के बीच कराए गए एक सर्वे में पता चला है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में विकास दर 4.7 फीसदी पर आ सकती है। सर्वे के अनुसार, वैश्विक मंदी ने भारत के निर्यात पर काफी असर डाला है। जून तिमाही में विकास दर पांच फीसदी रही थी, लेकिन सितंबर तिमाही में यह पिछली 26 तिमाहियों में सबसे कमजोर रह सकती है।
2018 की समान तिमाही में यह सात फीसदी रही थी। सरकार सूत्रों के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सितंबर तिमाही में विकास दर चार फीसदी से भी नीचे जा सकती है। इससे पहले जनवरी-मार्च 2013 में विकास दर 4.3 फीसदी रही थी। इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री दिवेंद्र पंत का कहना है कि उपभोक्ता खपत में गिरावट की वजह से शहरी क्षेत्र की विकास दर काफी सुस्त हो सकती है।