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उत्तराखंड में 3 महीने बाद एक बार फिर कोरोना ने पकड़ी रफ्तार, हरिद्वार में मंडरा रहा खतरा

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फाइल फोटो

 

हरिद्वार : उत्तराखंड में एक बार फिर कोरोना रफ्तार पकड़ने लगा है. महीनों बाद बीते दिन 200 कोरोना संक्रमण के केस सामने आए. जनवरी के बाद ये ऐसा पहला मौका था जब इतने बड़े पैमाने पर कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए. इससे पहले उत्तराखंड में जनवरी के बीच एक हफ्ते में 895 केस आए थे.जनवरी के बाद ये ग्राफ लगातार गिर रहा था. यानी कि कोरोना का संक्रमण कम होता जा रहा था. आंकड़े देखें तो फरवरी आते-आते कोरोना पॉजिटिव केसों की संख्या कम हो गई थी उसके बाद फिर ग्राफ बढ़ना शुरू हुआ ऐसे में अब हरिद्वार कुम्भ में आने के लिए कोविड की नेगेटिव रिपोर्ट जरूरी हो गई है। हाइकोर्ट के आदेश के बाद मुख्य सचिव ने तस्वीर साफ कर दी है।

बात करें हरिद्वार की तो इस हफ्ते कोरोना संक्रमण एक बार फिर रफ्तार पकड़ते हुए नजर आ रहा है. कोविड-19 के बढ़ते मरीजों ने कुंभ मेला एवं जिला प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी है। बीते 4 महीने बाद बुधवार को सबसे अधिक 62 मरीज मिले हैं। बाहरी राज्य से आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन से संक्रमण बढ़ रहा है अभी नहीं संभले तो अप्रैल के कुंभ स्नान तक हालात बेकाबू होने की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बुधवार को 62 पोजिटिव मिले हैं। जिले में कुल सदस्यों की संख्या 148 पहुंच गई है। 32 मरीज़ कोविड केअर सेंटर में है बाकी होम क्वारंटाइन में हैं। कुम्भ स्नान में कोरोनावायरस की निगेटिव रिपोर्ट और टीकाकरण प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को संत समाज ने सकारात्मक कदम बताया है।

संतों ने कहा है कि कोरोना वैश्विक महामारी है। इसके बचाव सबसे पहले जरूरी और सब की जिम्मेदारी है। दिव्या भव्य कुम्भ आयोजन के लिए सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। सरकार संतों को और श्रद्धालुओं की टीकाकरण ओर जांच का दायरा बढ़ाए। ऐसे में मुख्यमंत्री के कोरोना पॉजिटिव आने की बाद कई संत और अधिकारी जहां मोहन है वहीं कोविड ने भी आगामी कुंभ पर संकट के बादल गहरा दिए हैं

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