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उत्तराखंड के जू में होगा लंदन जैसा एहसास, दुनियाभर में मिलेगी पहचान

khabar ukदेहरादून: वन विभाग उत्तराखंड में देहरादून के मालसी डीयर पार्क, नैनीताली, अल्मोड़ा के ज़ू समेत हल्द्वानी में एक निर्माणाधीन और एक प्रस्तावित जू को अत्याधुनिक बनाने व विकसित करने के लिए लंदन के जू विशेषज्ञयों की मदद ली जाएगी। हल्द्वानी में अंतरराष्ट्रीय स्तर का चिड़ियाघर बनाये जाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहां है । इस चिड़ियाघर के निर्माण के लिए 300 करोड़ का बजट दुनिया में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था जूलाॅजिकल सोसायटी ऑफ लंदन देगी।

जेडएसएल करेगी मदद

संस्था चिड़ियाघरों को लंदन जू की तर्ज पर विकसित करेगी। जेडएसएल संस्था की मदद से जू में काम करने वाले कर्मचारियों की विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। चिड़ियाघरों में वन्यजीवों के इलाज समेत और सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रमुख वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं, वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त, तराई पूर्वी डीएफओ और वन विभाग के अधीन काम करने वाले पशु चिकित्सकों की टीम जूलोजिकल सोसाइटी आफ इंडिया (जेडएसएल) के सहयोग से ब्रिटेन गई थी। जेडएसएल ही लंदन जू एवं अन्य चिड़ियाघरों का प्रबंधन का काम करता है।

कर्मचारियों को प्रशिक्षण

वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त एवं अंतरराष्ट्रीय जू के निदेशक डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार लंदन जू में कई तकनीक देखने को मिली हैं। जेडएसएल चिड़ियाघर में करने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेगा। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने बताया कि जूलाजिकल सोसायटी ऑफ लंदन व भारतीय वन्यजीव संस्थान के बीच हुए समझौतों के तहत छह अफसरों की टीम ने लंदन भ्रमण पर गई थी। चिड़ियाघर के निर्माण को लेकर जल्द प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा।

इलाज के तरीके

डॉ.धकाते के अनुसार अगर कोई वन्यजीव घायल या बीमार है, तो हमारे यहां पकड़कर इलाज किया जाता है, इससे वन्यजीव कई बार स्ट्रेस में आते हैं, जबकि लंदन जू में पशु चिकित्सक वन्यजीवों को पहले इलाज के लिए तैयार करते हैं। मसलन उसके पास इंजेक्शन ले जाकर दिखाना, फिर उसे कुछ खाने की चीज देना समेत कई तरीकों को अपनाते हैं।

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