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विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा का समापन, यात्रियों को स्मृति चिन्ह देकर विदा

Breakinh uttarakhand newsहल्द्वानी : 12 जून से शुरू हुई विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा का आज विधिवत समापन हो गया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के 18 वें यानी अंतिम दल के सभी यात्री कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी कर काठगोदाम पहुंचे। जहां सभी यात्रियों का स्वागत सत्कार किया गया और कुमाऊं मंडल विकास निगम की तरफ से स्मृति चिन्ह देकर उन्हे विदा किया गया। इस आखरी जत्थे के साथ ही इस वर्ष की कैलाश मानसरोवर यात्रा का विधिवत समापन हो गया है।

विश्व की सबसे ज्यादा पैदल दूरी वाली यात्रा-

कैलाश मानसरोवर यात्रा दुनिया की सबसे बड़ी और लंबी पैदल दूरी वाली यात्रा है, जिसमें 280 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है 20 दिन तक चलने वाली इस यात्रा में प्राकृतिक सौंदर्य रोमांच और भगवान शिव के साक्षात वास स्थल कैलाश पर्वत के दर्शन होते हैं यात्रा मार्ग में जाने वाले भक्तों का कहना है कि यह दुनिया की सबसे अनूठी और विहंगम यात्रा है जिसमें पहाड़ मैदान पठार समुंद्र बर्फ प्रकृति के सारे रंग रूपों को देखने का सौभाग्य मिलता है।

इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 949 यात्री पंजीकृत हुए थे जिसमें से भगवान भोलेनाथ के दर कैलाश पर्वत के दर्शन करने के लिए 925 भक्त पहुंचे, अट्ठारह दलों के माध्यम से की गई इस यात्रा में 727 पुरुष और 198 महिला यात्रियों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा कर भगवान भोलेनाथ के वास स्थल कैलाश पर्वत के दर्शन किए, यात्रियों का कहना है की इस वर्ष यात्रा में उनको किसी भी प्रकार की कोई दिक्क्त नहीं हुई जिसका मुख्य कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी है जिनकी मजबूत विदेश निति के चलते इस बार चाइना सरकार ने हमे किसी भी तरह से कभी परेशान नहीं किया.

उत्तराखंड में कुमाऊं मंडल विकास निगम के सहयोग से की जाती है कैलाश मानसरोवर यात्रा-
भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा संचालित की जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा दिल्ली से शुरू होती है और उत्तराखंड होते हुए तिब्बत चीन में जाकर कैलाश मानसरोवर तक जाती है इस यात्रा का सबसे ज्यादा मार्ग उत्तराखंड में व्यतीत होता है, लिहाजा उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर यात्रियों की सुविधाओं के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम यानी (केएमवीएन) को संचालन का जिम्मा दिया जाता है इस वर्ष कुमाऊं मंडल विकास निगम के 56 कर्मचारी धारचूला से अंतिम भारतीय पड़ाव नाभि ढांग तक तैनात रहे। इसके अलावा 49 चिकित्सा कर्मी और एसडीआरएफ के 90 जवान सहित भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवान और महिला कमांडो भी तैनात रही।

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